जर्मनी में प्रगतिशील पहल - Naya India
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जर्मनी में प्रगतिशील पहल

जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने अब एक ऐसी पहल की है, जिससे उनका नाम इतिहास में दर्ज हो सकता है। मैर्केल 2005 से जर्मनी की चांसलर हैं। जर्मनी की पहली महिला चांसलर बनने से पहले मैर्केल अपनी पार्टी सीडीयू की पहली महिला अध्यक्ष भी बनी थीं। साल 2000 से 2018 तक उन्होंने यह पद संभाला। फिर उनके बाद भी पार्टी की जिम्मेदारी एक महिला को ही सौंपी गई। तब आनेग्रेट क्रांप कारेनबावर को मैर्केल के बाद जर्मनी की अगली चांसलर के रूप में भी देखा जाने लगा था। लेकिन बाद में एक विवाद के कारण उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। बहरहाल, अपने इस आखिरी कार्यकाल में मैर्केल महिलाओं के लिए अन्य जगहें भी पक्की करना चाहती हैं। वैसे भी उन्होंने अपने चौथे मंत्रिमंडल में लगभग आधे मंत्रालय महिलाओं को देकर पूरी दुनिया को एक संदेश दिया था। अब उन्होंने अपनी पार्टी के पदों और कमेटियों में महिलाओं के लिए एक निश्चित संख्या आरक्षित कर दी है। ये कोशिश इसलिए जरूरी है, क्योंकि महिलाओं की भागीदारी जर्मनी जैसे विकसित देश में भी बेहतर नहीं है। खुद मैर्केल की पार्टी- सीडीयू पार्टी में महज एक चौथाई सदस्य ही महिलाएं हैं। यही वजह है कि मैर्केल पार्टी में महिलाओं को बेहतर मौके देकर इसे बदलना चाहती हैं। सालों तक चली बहस के बाद आखिरकार उनकी पार्टी ने 2025 तक पार्टी नेतृत्व महिलाओं और पुरुषों में बराबरी से बांटने का फैसला किया है।

महिलाओं के लिए सीडीयू में अब कोटे की व्यवस्था होगी। अगले साल पार्टी के मुख्य पदों पर 30 फीसदी हिस्सा महिलाओं का होगा। 2023 तक इसे 40 और 2025 तक 50 फीसदी करने का लक्ष्य रखा गया है। जाहिर है, पार्टी के कुछ लोग इस फैसले से नाखुश हैं। पार्टी के रूढ़िवादी हिस्से का मानना है कि महिलाओं को अपनी प्रतिभा के दम पर जगह मिलनी चाहिए, कोटे के जरिए नहीं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि चांसलर, पार्टी अध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की मौजूदगी के बाद इस तरह का फैसला सही नहीं है। मगर मैर्केल अपने इरादे पर कायम रहीं और फिलहाल ये व्यवस्था कराने में वे सफल रही हैं। उन्हें इस बात का ख्याल है कि उनके 15 साल तक चांसलर रहने के बाद भी जर्मनी में महिलाओं के लिए राजनीति में सक्रिय होना आसान नहीं बना है। इसलिए उन्होंने विशेष प्रावधान किए हैं और यह स्वागतयोग्य है।

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