नेपाल की नई चाल

नेपाल ने इस बार जो कदम उठाया है, वह भारत के साथ एक ठोस और संभवतः दीर्घकालिक विवाद की जड़ बनेगा। बेशक इसके लिए भारतीय कूटनीति भी जिम्मेदार है। जब एक सीमाई मुद्दा उठा और नेपाल उस पर तुरंत बातचीत करना चाहता था, तो इस बात का कोई तर्क नहीं था कि भारत कोरोना संकट की बात कहकर उससे इनकार कर देता। भारतीय सेना अध्यक्ष जनरल मनोज नरवणे के इस बयान से भी नेपाल में माहौल गरमाया कि नेपाल सीमाई सवाल किसी और के उकसावे पर उठा रहा है। जाहिर है, इशारा चीन की तरफ था। अब नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानत्रिच स्वीकार किया है, जिसमें विवादित लिपु लेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। ये मामला उसी समय उठा है, जब सिक्किम के पास भारत और चीन के फौजियों में हाथापाई होने के बाद अक्साइ चिन में एक मुकाम पर भारत और चीन के सैनिकों ने आमने-सामने मोर्चाबंदी की हुई है।

नेपाल सरकार के ताजा फैसले के पहले नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपु लेख को नेपाल की सीमा में लौटाने की मांग करते हुए संसद में विशेष प्रस्ताव भी रखा था। लिपुलेख दर्रा, नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा- कालापानी के पास एक दूर स्थित पश्चिमी स्थान है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपनी सीमा का अभिन्न हिस्सा बताते हैं। भारत उसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा बताता है, जबकि नेपाल इसे अपने धारचुला जिले का हिस्सा बताता है। इन हिस्सों को भारत का मानचित्र लंबे समय से अपने हिस्से में दिखाता रहा है। हालांकि नेपाल अब इसे 1816 की सुगौली संधि का उल्लंघन बता रहा है, लेकिन हाल के दशकों में कभी उसने इस पर अपना दावा नहीं जताया। अब नेपाल सरकार ने कहा है कि उसका भूमि प्रबंधन मंत्रालय जल्द ही नेपाल का आधिकारिक मानचित्र सार्वजनिक करेगा। इसके पहले नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप गयावली ने भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पिछले हफ्ते तलब किया था। गयावली ने उत्तराखंड में धारचुला के साथ लिपुलेख को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग के निर्माण के खिलाफ विरोध जताते हुए एक कूटनीतिक दस्तावेज भी सौंपा था। जबकि भारत का कहना है कि उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ जिले में हाल में उद्घाटित सड़क मार्ग पूरी तरह उसकी सीमा के भीतर आता है। बेहतर होता, यह विवाद भारत-नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों की भावना के तहत हल हो जाता। लेकिन फिलहाल यह हाथ से निकलता मालूम पड़ता है।

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