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अबकी टूटी आम सहमति

अमेरिका में ऐसा पहली बार हुआ है। जब से इजराइल बना, उसे समर्थन देने के सवाल पर अमेरिका की दोनों प्रमुख पार्टियों में लगभग आम-सहमति रही है। रिपब्लिकन पार्टी की नीतियां इजराइल के पक्ष में थोड़ी अधिक झुकी रहती थीं, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी भी कुल मिलाकर उसके पक्ष में ही रहती थी। लेकिन इस बार ये आम सहमति टूट गई है। इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी में इस मुद्दे पर जमकर खींचतान चल रही है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि इजराइल को आत्म-रक्षा का अधिकार है। परोक्ष रूप से इस पर की कटाक्ष करते हुए पार्टी के प्रोग्रेसिव गुट के नेता बर्नी सैंडर्स ने कहा कि जैसा अधिकार इजराइल को है, वैसा ही फिलस्तीनियों को भी है। सैंडर्स ने उलटे बाइडेन को चुनौती दी दी कि अगर उन्हें विश्व मंच पर मानव अधिकारों के पक्ष में विश्वसनीय आवाज बनना है, तो मानव अधिकार के अंतरराष्ट्रीय मानकों का उन्हें तब भी समर्थन करना चाहिए, जब ऐसा करना राजनीतिक रूप से मुश्किल हो। दरअसल, जैसे-जैसे उस क्षेत्र में हिंसा और सांप्रदायिक अशांति बढ़ रही है, पार्टी के अंदर मतभेद गहरा रहे हैं।

इजराइल के आत्म-रक्षा के अधिकार पर के बारे में दिए बयान का हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य इल्हान उमर ने खुला मखौल उड़ाया। कहा कि बाइडेन मानव अधिकारों को केंद्र में नहीं रख रहे हैं, बल्कि इजराइल के दमनकारी कब्जे का साथ दे रहे हैं।’ हाउस की डेमोक्रेटिक सदस्य एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कॉर्तेज ने इजराइल पर आतंकवाद फैलाने और नस्लीय संहार करने का आरोप लगाया है। जाहिर है कि कुछ वर्ष पहले तक डेमोक्रेटिक पार्टी के किसी नेता से इजराइल के लिए ऐसे शब्द सुनना लगभग असंभव था। अब डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव नेता पूछ रहे हैं कि अमेरिकी डॉलरों का इस्तेमाल दमन, हिंसा और फिस्तीनियों के उत्पीड़न में क्यों हो रहा है? लेकिन राष्ट्रपति बाइडेन अमेरिका के यहूदी मतदाताओं को नाराज नहीं करना चाहते। ये जग-जाहिर है कि अमेरिका में एक मजबूत यहूदी लॉबी है। दोनों पार्टियों की नीति पर उसका स्पष्ट प्रभाव रहता आया है। पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दौर में ये प्रभाव कुछ ज्यादा गहरा हो गया था। ट्रंप ने अमेरिकी नीति को लगभग पूरी तरह इजराइल के पक्ष में झुका दिया। अब बाइडेन संभवतः इजराइल के प्रति अमेरिकी नीति में बराक ओबामा के दौर जैसा संतुलन कायम करना चाहते हैँ। लेकिन ये काम उनकी पार्टी में पैदा हुए मतभेदों के कारण अब कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

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