असांज का होगा प्रत्यर्पण?

कई सनसनीखेज मामलों से पर्दा उठाने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के संस्थापक जूलियान असांज को अमेरिका भेजे जाने के मामले में लंदन में सुनवाई शुरू हो गई है। अमेरिका असांज को प्रत्यर्पण के जरिए देश के अंदर ला कर उन पर अफगानिस्तान और इराक में हुए युद्धों से संबंधित गुप्त जानकारी छापने के आरोपों पर मुकदमा चलाना चाहता है। 49 वर्षीय असांज मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं। फिलहाल एक जेल में रिमांड पर बंद हैं। अमेरिकी सरकार के वकीलों ने उन पर 18 आरोप लगाए हैं, जिनके तहत दोषी पाए जाने पर उन्हें 175 साल कैद सुनाई जा सकती है। लंदन के केंद्रीय आपराधिक कोर्ट ओल्ड बेली में शुरू हुई ये सुनवाई तीन से चार हफ्तों तक चल सकती है। इसे अप्रैल में ही शुरू होना था, लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया था। वैसे यह लगभग तय ही है कि जो भी पक्ष हारेगा, वो फैसले के खिलाफ अपील करेगा। इससे असांज के जेल में और ज्यादा समय बिताने की संभावना अधिक बढ़ जाएगी। असांज समर्थकों का कहना है कि असांज का पक्ष “बहुत मजबूत” है।

लेकिन उन्हें यह चिंता है कि मामले का अब काफी अधिक राजनीतिकरण हो चुका है। इससे पहले फरवरी में हुई एक सुनवाई के दौरान बताया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस शर्त मर असांज को माफ कर देने को तैयार हैं, अगर वो इस बात से इनकार कर दें कि 2016 के अमेरिकी चुनावों के दौरान हिलेरी क्लिंटन के ई-मेलो को रूस ने लीक किया था। असांज पर 2010 में अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका के सैन्य अभियानों की विस्तृत जानकारी वाली 5,00,000 गुप्त फाइलें जारी करने के लिए अमेरिका के जासूसी कानून के तहत आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका का दावा है कि असांज ने खुफिया विश्लेषक चेल्सी मैनिंग की इन कागजात को चुराने में मदद की। मानवाधिकार अधिकार समूह कॉउन्सिल ऑफ यूरोप ने चेतावनी दी है कि असांज के प्रत्यर्पण का यूरोप और बाकी दुनिया में प्रेस की आजादी पर एक बहुत गहरा असर पड़ेगा। असांज के दूसरे समर्थकों में पिंक फ्लॉयड के सह-संस्थापक रॉजर वॉटर्स, अभिनेत्री पामेला एंडरसन, डिजाइनर विवियन वेस्टवुड और ग्रीस के पूर्व वित्त-मंत्री यानिस वारुफाकिस आदि असांज के संभावित प्रत्यर्पण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। कुल मिला कर इस मामले दुनिया का ध्यान खींचा है। कहा जा रहा है कि यूरोप की मानवाधिकारों के प्रति निष्ठा दांव पर लगी हुई है।

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