कश्मीर में फिर अशांति - Naya India
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कश्मीर में फिर अशांति

कश्मीर में पिछले महीने- यानी जून में 43 उग्रवादी मुठभेड़ में मारे गए। इस दरम्यान कई सुरक्षाकर्मी भी हताहत हुए। इन घटनाओं ने यह जाहिर किया कि पिछले अगस्त के बाद कश्मीर में घाटी में जो खामोशी थी, वह टूट रही है। ऐसा क्यों हो रहा है? क्या पाकिस्तान ने कोई नई रणनीति बनाई है? या भारत का खुफिया तंत्र कहीं कमजोर पड़ रहा है? इन्हीं घटनाओं के बीच कश्मीर घाटी में एक बार फिर से किसी बड़ी कार्रवाई की आशंका से माहौल खौफजदा हो गया है। लद्दाख में भारत और चीन की सीमा पर लगातार बने हुए तनाव के बीच, जम्मू और कश्मीर प्रशासन की तरफ से जारी किए गए दो निर्देशों की वजह से चिंता और घबराहट का माहौल बन गया है। ये दो निर्देश कश्मीर में एलपीजी सिलिंडरों के दो महीनों के स्टॉक की उपलब्धि सुनिश्चित करने और गांदेरबल जिले में सभी सरकारी स्कूलों को सुरक्षाबलों के रहने के लिए खाली करवाने के संबंध में हैं। सिलिंडरों वाला निर्देश 27 जून को जारी हुआ। इसके मुताबिक जम्मू और कश्मीर के उप-राज्यपाल के सलाहकार का आदेश है कि घाटी में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए।

निर्देश में इस कदम के पीछे जिस कारण का जिक्र है, वो भूस्खलन की वजह से राष्ट्रीय राज्यमार्ग के बंद हो जाने की संभावना है। स्कूलों को खाली कराने का निर्देश गांदेरबल पुलिस विभाग के सीनियर सुपरिंटेंडेंट ने गांदेरबल के डिप्टी कमिश्नर को भेजा है। इसमें कम से कम 16 स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों को केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों के रहने के लिए खाली कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र में लिखा है कि ये सुरक्षाकर्मी अमरनाथ यात्रा के दौरान सुरक्षा के इंतजामों के लिए तैनात रहेंगे। दोनों ही पत्रों में इन कदमों के पीछे उनके कारण की स्पष्ट चर्चा है। इसके बावजूद घाटी में इन कदमों को ले कर काफी संदेह इसलिए है, क्योंकि इसी तरह के कदम वहां अगस्त 2019 में भी उठाए गए थे। उन्हें उठाने के कुछ ही दिनों बाद केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर राज्य का संवैधानिक दर्जा बदल कर उस से विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया था। पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट कर कहा कि ये सरकारी निर्देश कश्मीर में घबराहट की स्थिति पैदा कर रहे हैं। तनाव के माहौल में अक्सर ऐसा होता है। इसलिए बेहतर होगा कि सरकार लोगों को भरोसे में ले। जब चीन से मोर्चा खुला हुआ है, एक और मोर्चे पर अविश्वास को बने रहने देना उचित नहीं होगा।

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