ऐसे कैसे बदलेगी छवि?

खबर है कि केंद्र सरकार एक बार फिर यूरोपीय राजनियकों को कश्मीर दौरे पर ले जाने की तैयारी में है। मकसद वही है- यानी दुनिया को यह दिखाना कि कश्मीर में हालात सामान्य हैं। इसके पहले यूरोपीय यूनियन के सांसद बुलाए गए थे और फिर अमेरिका सहित कई देशों के राजनयिकों को कश्मीर दौरा कराया गया। लेकिन उन सब से भारत की छवि को बहुत लाभ नहीं हुआ। अभी कुछ ही दिन पहले यूरोपीय संसद में कश्मीर मसले पर एक बेहद आलोचनात्मक प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिस पर मार्च के मध्य में मतदान तय है। जब कभी ऐसी विदेशी प्रतिक्रियाएं आती हैं, भारत की सत्ताधारी पार्टी कहती है कि उसे इसकी परवाह नहीं है कि दूसरे देश क्या सोचते हैं। मगर उनकी धारणा बदलने के लिए वह लगातार प्रयासरत भी है। बहरहाल, इसमें कामयाबी नहीं मिली है तो इसलिए कि कश्मीर में सचमुच स्थिति सामान्य नहीं है। वरना, राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को छह महीने नजरबंद रखने के बाद उन पर पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट क्यों लगाया जाता? ये घटना इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर में हालात सामान्य होने में अभी काफी समय लगेगा। पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत चार नेताओं के खिलाफ उनकी छह महीने लम्बी हिरासत के आखिरी दिन कश्मीर का विवादास्पद कानून पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगा दिया गया। पीएसए के तहत आरोपी को कई महीनों तक सुनवाई के बिना हिरासत में रखा जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्रियों के अलावा दो और नेताओं नेशनल कांफ्रेंस के अली मोहम्मद सागर और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के सरताज मदनी के खिलाफ भी पीएसए लगा दिया गया। एक और पूर्व मुख्यमंत्री और उमर के पिता फारूक अब्दुल्लाह पहले से ही पीएसए के तहत हिरासत में है। माना जा रहा है कि सरकार ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि अब इन नेताओं को निवारक हिरासत में रखना मुश्किल हो गया था और सरकार अभी उन्हें रिहा नहीं करना चाह रही थी। उमर और मुफ्ती के खिलाफ पीएसए लगाए जाने पर विपक्षी पार्टियों ने और कई स्वतंत्र समीक्षकों ने भी आक्रोश व्यक्त किया। कहा कि आरोपों के बिना कैद लोकतंत्र में सबसे घृणास्पद बात है।  पीएसए जम्मू और कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला के कार्यकाल में 1978 में लागू हुआ था। इसमें बिना आरोप और बिना सुनवाई के व्यक्ति को हिरासत में रखने का प्रावधान है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे “गैर-कानूनी कानून” की संज्ञा दी है।

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