उलझा गया जाधव का मामला

कुलभूषण जाधव के मामले में भारत के लिए बहुत मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है। ये साफ है कि इस बार पाकिस्तान ने चाल बहुत सोच-समझ कर चली है। इस मामले में याचिका दायर करने के लिए भारत को मौका दे कर पाकिस्तान सरकार ने यह पैगाम देने की कोशिश की है कि उसने असहयोग नहीं किया। मगर याचिका दायर करने की आखिरी तारीख के महज 10 दिन पहले उसने ये न्योता दिया। जानकारों के मुताबिक याचिका तैयार कर अदालत में दायर करने के लिए इतना समय पर्याप्त नहीं है। यह देखना होगा कि भारत सरकार इतने कम समय में क्या कदम उठाती है। जानकारों का कहना है कि बताई गई अवधि के बाद सिर्फ क्षमा याचिका पर ही कार्यवाही आगे बढ़ेगी। जबकि क्षमा याचिका पर कार्यवाही आगे बढ़ने का मतलब होगा कि जाधव के खुद पर लगे आरोपों को कथित रूप से स्वीकार कर लेने के बाद भारत ने भी ये बात मान ली है।

पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले पर पिछले हफ्ते दो नए वक्तव्य दिए। माना जा रहा है कि इनसे भारत के लिए जाधव को बचाने के विकल्प सीमित हो गए हैं। जाधव को अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। मई 2017 में भारत ने इसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में मुकदमा दायर कराया था। आइसीजे ने जुलाई 2019 में फैसला दिया था कि पाकिस्तान को सजा पर पुनर्विचार करना चाहिए और भारतीय दूतावास के अधिकारियों को जाधव से मिलने की अनुमति देनी चाहिए। पाकिस्तान सरकार ने पिछले आठ जुलाई को एक वक्तव्य में कहा कि खुद जाधव ने सैन्य अदालत के मृत्युदंड के आदेश को चुनौती देने से मना कर दिया है। इसकी जगह जाधव ने उनके द्वारा अप्रैल 2017 में दायर की गई क्षमा याचिका पर आगे की कार्यवाही करना बेहतर समझा है। पाकिस्तान सरकार ने यह भी कहा कि दूसरी बार भारतीय दूतावास के अधिकारियों को जाधव से मिलने का प्रस्ताव भी दिया गया है। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि उसने 20 मई को एक अध्यादेश के जरिए 60 दिनों के अंदर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में जाधव की सजा की फिर से समीक्षा करने की याचिका दायर करने की अनुमति दे दी थी। उसकी आखरी तारिख 19 जुलाई है। उसके बाद महज क्षमा याचना पर कार्रवाई होगी।

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