हेट स्पीच की नई परिभाषा

जर्मनी की एक अदालत ने हेट स्पीच यानी नफरत भरे भाषणों के दायरे को बढ़ा दिया है। उसने जो नई परिभाषा दी है, उससे दुनिया भर में बहस का एक नया बिंदु मिला है। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में अन्य देशों में हेट स्पीच की परिभाषा को इस तरह विस्तृत करने की कोशिश होगी। जर्मन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि देश के हेट स्पीच कानून के तहत महिलाओं के खिलाफ कही गई बातें और उन्हें बदनाम करने की कोशिशें भी शामिल हैं। मामला एक ऐसे पुरुष का था जो अपनी वेबसाइट पर महिलाओं को “दोयम दर्जे” वाली और “कमतर” बताया करता था। कोलोन के अपील कोर्ट के जज ने कहा कि विश्व-युद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी में घृणा भाषण या भड़काने वाले भाषण के खिलाफ बने कानूनों के तहत महिलाओं कों भी सुरक्षा मिली हुई है, जिन्हें महिला होने के कारण अपमान का सामना करना पड़े। जज ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका सबसे बड़ा मकसद मानव गरिमा की रक्षा करना है।

आरोपी पुरुष पर आरोप है कि वह अपनी वेबसाइट पर महिलाओं को ‘जानवरों जैसी’ और ‘कमतर इंसान’ बताता था। इसकी शिकायत पर पहले तो एक निचली अदालत ने उस पर जुर्माना लगाया। फिर बॉन की अपील कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। फिर कोलोन के अपील कोर्ट में पहुंचे मामले में जज का ये ताजा फैसला आया। अब इस केस को बॉन शहर के हाई कोर्ट में दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया गया है। निचली अदालत ने कहा था कि जर्मन दंड संहिता के अनुच्छेद 130 में हेट स्पीच के खिलाफ अल्पसंख्यकों को तो सुरक्षा दी गई है, लेकिन उसमें महिलाओं का कोई जिक्र नहीं है। मगर कोलोन की उच्च स्थानीय अदालत ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि कानून आबादी के ऐसे किसी भी हिस्से को सुरक्षा देता है, जिसे भेदभाव का शिकार होना पड़े। इस संदर्भ में महिलाएं भी शामिल हैं। अदालत ने अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक होने की समय और परिस्थिति के साथ बदलती परिभाषा का भी जिक्र किया, क्योंकि संख्या के लिहाज से तो जर्मनी में महिलाएं पुरुषों से ज्यादा यानी 52:48 के अनुपात में हैं। अगर अगली अदालत ने ये फैसला बरकरार रखा तो आरोपी को 5 साल तक की कैद सुनाई जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares