कोरोना से जल्द राहत नहीं

कोरोना वायरस अब अनेक देशों में फैल चुका है। इससे होती मौतें और इसका आतंक लगातार दुनिया भर के मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि दुनिया को इससे जल्द मुक्ति मिलती नहीं दिखती। जानकारों का अनुमान है कि चीन से शुरु हुए कोरोना वायरस का संक्रमण अप्रैल तक खत्म हो पाएगा। अब तक इस वायरस के कारण मरने वालों की तादाद 1100 के पार चली गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे एक बहुत गंभीर वैश्विक खतरा बता चुका है। इस महामारी के कारण चीन में बहुराष्ट्रीय कंपनियां जद्दोजहद करती नजर आई हैं। चीनी नए साल की छुट्टियों के बाद कामकाज शुरु करने में उन्हें बड़ी मुश्किलें आ रही हैं।

कई कंपनियां लोगों को नौकरियों से निकाल भी रही हैं। चीन दुनिया के बहुत से देशों को चीजें निर्यात करता है। ऐसे में कार निर्माताओं से लेकर स्मार्टफोन बनाने वाली तमाम वैश्विक कंपनियों को सप्लाई चेन में रुकावट का सामना करना पड सकता है। वैसे चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में नए संक्रमण के मामले धीरे-धीरे कम होने लगे हैं। मगर आशंका यह है कि फरवरी महीने में यह महामारी अपने चरम तक पहुंचेगी अप्रैल तक जाते-जाते खत्म हो पाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि 11 फरवरी तक कोरोना के चीन में करीब 43 हजार मामले सामने आए। चीन के अलावा अन्य 24 देशों में केवल 319 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वायरस के सैंपल शेयर किए जाएं और इसके लिए जल्द से जल्द कोई दवा या टीका बनाने की ओर बढ़ा जाए। उसके मुताबिक इसके 99 फीसदी मामले चीन में ही आए हैं। यानी अभी तक यह काफी हद तक एक देश तक सीमित आपातकाल ही है, लेकिन आगे चल कर यह बाकी दुनिया के लिए बड़ा संकट बन सकता है।

बहरहाल, इस बीमारी से चीनी अर्थव्यवस्था पर बड़ा कहर टूटा है। कई कंपनियां अपने हजारों कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ पा रही हैं। चीनी सरकार ने अब तक देश में नौकरियों में स्थिरता लाने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है। चीन के आर्थिक विकास के पूर्वानुमान को लगभग सभी बड़ी मार्केट रिसर्च कंपनियों ने घटा दिया है। कुल मिलाकर यह कोरोना वायरस के मारक प्रहार का सूचक है। इससे बाकी दुनिया को सबक लेने की आवश्यकता है।

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