Narendra Modi US Visit “विश्व—प्रिय नरेंद्र मोदी”
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‘विश्व—प्रिय नरेंद्र मोदी’

Narendra Modi US Visit

असल बात यही है कि वो कहानी गुम हो गई है, जिसके बूते इस सदी में भारत के किसी नेता का विदेशों में रुतबा बनता था। क्यों गुम हो गई, ये बात उस ब्लैक अमेरिकी नागरिक ने बताई। जब ये सूरत-ए-हाल तो फिर उस इंडिया स्टोरी का गुम होना लाजिमी ही है, जो 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद बनी थी। Narendra Modi US Visit

इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उनके विरोधियों को ऐसा काफी कुछ मिला, जिसके आधार पर उन्होंने खास कर सोशल मीडिया पर ये धारणा बनाई कि विदेशों में मोदी का तिलस्म चूक गया है। ये तमाम तथ्य खुद उस मीडिया की रिपोर्टिंग से मिले, जिसे भाजपा विरोधी भक्त या गोदी मीडिया कहते हैँ। मसलन, एक वीडियो क्लिप में यह दिखाया गया कि अमेरिकी अखबारों ने मोदी की यात्रा को तवज्जो नहीं दी। मोदी के स्वागत में लाए गए एक संगीतकर्मी ने ऑन एयर कह दिया कि संगीत उसका पेशा है, वो वहां इसलिए आया है क्योंकि उसे लाया गया है। जब एक टीवी रिपोर्टर ने यूं ही सड़क पर जा रहे एक एक ब्लैक अमेरिकी से पूछा कि वह मोदी के बारे में क्या जानता है, तो उसने कहा कि प्राइम मिनिस्टर मोदी के राज में भारत में गरीबी बढ़ी है। जाहिर है, ये बातें उस छवि के खिलाफ हैं, जो बड़ी मेहनत से भाजपा के आईटी सेल ने देश के लाखों लोगों के दिमाग में बैठा रखी है। तो डैमेज कंट्रोल शुरू हुआ।

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सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो क्लिप में अलग-अलग देशों का नाम लेते हुए कहा गया है कि भले पश्चिमी देशों के पास तरह-तरह की ताकत हो, लेकिन भारत के पास दुनिया का बेस्ट प्राइम मिनिस्टर है। एक फोटोशॉप किए स्टीकर में न्यूयॉर्क टाइम्स के मास्ट हेड के नीचे हेडिंग यह कहती दिख रही है कि मोदी ही धरती की आखिरी उम्मीद हैं। लेकिन शायद भाजपा नेतृत्व को महसूस हुआ कि डैमेज कंट्रोल सिर्फ आईटी सेल के बूत की बात नहीं है, तो उसने मोदी के विदेश से लौटने पर भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया। उसके जरिए संदेश दिया गया कि ‘विश्व प्रिय मोदी’ ने विश्व मंच पर भारत की मजबूत भूमिका बना दी है। मुमकिन है कि ये प्रचार अभियान कारगर हो, तो जिनके दिमाग में तिलिस्म है, वह अक्षत रह जाए। लेकिन असल बात यही है कि वो कहानी गुम हो गई है, जिसके बूते इस सदी में भारत के किसी नेता का विदेशों में रुतबा बनता था। क्यों गुम हो गई, ये बात उस ब्लैक अमेरिकी नागरिक ने बताई। क्रेडिट स्विसे ने पिछले दिनों अपनी वेल्थ रिपोर्ट में बताया था कि 2020 में भारत में लगभग 600 अरब डॉलर वेल्थ घटा। जब ये सूरत-ए-हाल तो फिर उस इंडिया स्टोरी का गुम होना लाजिमी ही है, जो 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद बननी शुरू हुई थी।

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