चुनाव से पहले डरा अमेरिका - Naya India
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चुनाव से पहले डरा अमेरिका

अमेरिका में 2016 के चुनाव में रूसी दखल इतना चर्चित हुआ कि उसकी जांच हुई। जांच रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि हुई कि रूस ने चुनाव नतीजों को प्रभावित किया। अब एक बार फिर वैसी ही आशंकाएं घर गई हैं। मशहूर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि रूसी, चीनी और ईरानी साइबर हैकर्स ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन के प्रचार अभियान को निशाना बनाया है। माइक्रोसॉफ्ट ने एक विशेष एलान में कहा- हम जिस गतिविधि की घोषणा कर रहे हैं, वह साफ करता है कि विदेशी समूहों ने 2020 के चुनाव को निशाना बनाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं, जैसा कि अपेक्षित ही था। कंपनी ने 2016 के आरोपों का उल्लेख किया, जब अमेरिकी चुनाव को रूसी हैकरों ने कथित रूप से निशाना साधा था। अमेरिकी की खुफिया एजेंसी और निजी साइबर सुरक्षा कंपनियों ने रूस की जीआरयू सैन्य खुफिया एजेंसी- जिसे फैंसी बेयर कहा जाता है- पर 2016 में चुनाव प्रभावित करना का आरोप लगाया था।

माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि फैंसी बेयर दोनों प्रचार अभियान को प्रभावित करने के लिए दोबारा इस कोशिश में जुट गए हैं। कंपनी के मुताबिक जो देखने में आया है, वह पिछले हमले के पैटर्न के अनुरूप है। इसमें ना केवल उम्मीदवारों और प्रचार अभियान के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था, बल्कि उन लोगों को भी जो अहम मुद्दों पर सलाह देते हैं। ट्रंप के प्रचार अभियान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात से हैरान नहीं है, क्योंकि ट्रंप के दोबारा चुने जाने की कोशिश बड़े पैमाने पर निशाने पर है। ट्रंप के प्रचार अभियान के अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन को निष्पक्षता और ईमानदारी से हरा देंगे। ट्रंप को किसी विदेशी दखल की जरूरत नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट के आरोप पर चीन और ईरान सरकार का कोई बयान नहीं आया है। मगर अमेरिका में रूसी दूतावास के प्रेस सचिव ने कहा कि चुनाव में रूस के दखल के आरोपों पर अधिकारियों ने तथ्यात्मक सबूत की अब तक पेशकश नहीं की है। राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव को दो महीने से कम समय बचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हैकर्स चुनाव से जुड़ी जानकारी जुटाने की कोशिश में हैं। हैरतअंगेज यह है कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश आज इस तरह असहाय नजर आ रहा है।

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