मुसीबत में नई मुसीबत

कोरोना महामारी से जब देश जूझ रहा है, टिड्डियों के हमले से एक नई समस्या खड़ी हो गई है। टिड्डियों के झुंड राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक फैल गए हैं। हालात यहां तक चिंताजनक हो गए हैं कि इनमें से कई राज्यों की सरकारों ने अलर्ट घोषित कर दिया है। परेशान किसान थाली बजाकर और शोर मचाकर टिड्डियों को भगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इनमें कामयाबी नहीं मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य संगठन के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मॉनसून के बाद भारत पर टिड्डियों का दूसरा बड़ा हमला हो सकता है। ताजा हमले से खरीफ की फसल को क्षति हुई है। अतीत में टिड्डियों के हमलों से अनेक देशों मेंखाद्य सुरक्षा का संकट पैदा हो चुका है। इसलिए भारत इस समस्या को हलके से नहीं ले सकता। पर्यवेक्षकों के मुताबिक टिड्डियां हर साल ईरान और पाकिस्तान से भारत पहुंचती हैं। भारत में ये टिड्डियां मॉनसून के वक्त ब्रीडिंग करती हैं।

ईरान और पाकिस्तान में ये दो बार अक्टूबर और मार्च में ब्रीडिंग करती हैं। मार्च में इन दोनों ही देशों में प्रजनन रोकने के लिए दवा का छिड़काव किया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना संकट से घिरे ईरान और पाकिस्तान में यह छिड़काव नहीं हुआ। भारत में दिख रहे टिड्डियों के हमले के पीछे इसे एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। अप्रैल के मध्य में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की क्षेत्रीय बैठक में टिड्डियों के खतरे को लेकर चर्चा हुई थी। भारत और पाकिस्तान समेत दक्षिण एशिया के कई देशों के प्रतिनिधि इसमें थे। वहां पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने माना कि कोरोना की वजह से इस बार टिड्डियों की ब्रीडिंग रोकने के लिए दवा का छिड़काव नहीं किया जा सका। इस कारण खुद पाकिस्तान में टिड्डियों का प्रकोप काफी बढ़ा हुआ है। इससे किसान परेशान हैं। ईरान और पाकिस्तान के अधिकारियों ने सफाई दी है कि इस बार कोरोना संकट के कारण टिड्डियों के प्रजनन को रोकने में इस्तेमाल होने वाली दवा वे नहीं मंगा पाए। अब जून में बरसात के साथ भारत को टिड्डियों के नए हमले का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि उस वक्त भारत-पाकिस्तान सीमा पर प्रजनन तेज हो जाएगा। जिस समय देश में लॉकडाउन पीड़ित गरीबों को मुफ्त अनाज बांटने की मांग उठ रही है, उस वक्त टिड्डियों से खाद्य सुरक्षा के लिए पैदा हो रहा खतरा गहरी चिंता की बात है।

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