COVID vaccine booster dose बूस्टर की जल्दबाजी क्यों?
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बूस्टर की जल्दबाजी क्यों?

COVID vaccine booster dose

अगर अस्पतालों को घाटे से बचाने के लिए ऐसा फैसला हुआ, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। बूस्टर डोज कब लगाए जाएं, यह फैसला विशेषज्ञों के जिम्मे छोड़ा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ जोर देते रहे हैं कि जब तक सबका पूरा टीकाकरण नहीं हो जाता, बूस्टर डोज की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।

इस खबर ने स्वाभाविक रूप से ध्यान खींचा है कि देश के प्राइवेट अस्पताल कोरोना संक्रमण के बूस्टर डोज की इजाजत के लिए लॉबिंग कर रहे हैँ। इन अस्पतालों ने करोड़ों की संख्या में वैक्सीन डोज खरीद लिए। लेकिन वहां जिस महंगी कीमत पर ये डोज लगे, उसे देखते हुए पर्याप्त मरीज वहां नहीं आए। जबकि जो डोज खरीदे गए, वे अगले जनवरी से मार्च तक एक्सपायर कर जाएंगे। जाहिर है, अस्पतालों को भारी घाटा होगा। तो उन्होंने सरकार को ‘समझाने’ की मुहिम शुरू कर दी है कि बूस्टर डोज की जरूरत है। अब जबकि कोरोना वायरस के ओमीक्रोन वैरिएंट का भय फैला है, तब अस्पतालों की इस मुहिम के लिए अनुकूल स्थितियां भी बन सकती हैँ। लेकिन अगर अस्पतालों को घाटे से बचाने के लिए ऐसा फैसला हुआ, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा। बूस्टर डोज कब लगाए जाएं, यह फैसला विशेषज्ञों के जिम्मे छोड़ा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ जोर देते रहे हैं कि जब तक सबका पूरा टीकाकरण नहीं हो जाता, बूस्टर डोज की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए।

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भारत में अभी भी 55 फीसदी से कुछ ही ऊपर आबादी को वैक्सीन का एक डोज लगा है। दोनों डोज तो सिर्फ एक तिहाई आबादी को लगे हैँ। ऐसे में भारत में बूस्टर डोज की बात बेतुकी है। फिर जबकि यह मालूम नहीं है कि नए वैरिएंट पर पुराने वैक्सीन का क्या असर होगा, सिर्फ भय के माहौल के कारण ऐसा कोई फैसला लेने का कोई तर्क नहीं दिखता। इसलिए उचित होगा कि सरकार इस मामले में विज्ञान सम्मत और जन हित का ख्याल करते हुए निर्णय ले। दावा किया गया है कि कोविड-19 बूस्टर टीका अनिवार्य है, क्योंकि समय के साथ खून में एंटीबॉडीज की मात्रा कम होने लगती है। एमआरनए वैक्सीनों की दूसरी डोज लगने के बाद उनका असर छह महीने बाद घटने लगता है। लेकिन अभी तक शोधकर्ताओं ने सावधानी बरतने की सिफारिश की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि वैक्सीन के पूरे डोज लेने के बाद भी कोई भी व्यक्ति खुद को पूरी तरह से सुरक्षित न माने। वह ये न समझ बैठे कि वे कोरोना वायरस से सुरक्षित है। असल में इस बात का जोखिम पूरा है कि अभी कोई प्रतिरक्षित हुआ ही न हो। बूस्टर डोज से भी ये सूरत बदलती नहीं है। इसलिए इस बारे में जल्दबाजी में फैसला बेतमलब होगा।

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