छवि बिगड़ेगी या सुधरेगी? - Naya India
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छवि बिगड़ेगी या सुधरेगी?

भारत सरकार चाहती है कि ट्विटर और विदेशों से संचालित तमाम सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म उसी तरह चलें, जैसाकि उसने देसी मीडिया को चलने के लिए प्रेरित या मजबूर कर रखा है। यानी वे एकतरफा संदेश फैलाएं। वे वही प्रसारित करें, जो सरकार चाहती है और जो भी मन में सवाल है उन्हें वे विपक्ष से पूछें।

तो दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के गुरुग्राम और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर दस्तक दी। वजह सबको मालूम है। भारत सरकार चाहती है कि ट्विटर और विदेशों से संचालित तमाम सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म उसी तरह चलें, जैसाकि उसने देसी मीडिया को चलने के लिए प्रेरित या मजबूर कर रखा है। यानी वे एकतरफा संदेश फैलाएं। वे वही प्रसारित करें, जो सरकार चाहती है और जो भी मन में सवाल है उन्हें वे विपक्ष से पूछें। इस तरह प्रधानमंत्री और सत्ताधारी दल की छवि निर्माण में वे सहायक बनें। ट्विटर ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा के एक ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ यानी ऐसी बात घोषित किया था जिसमें तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया। पात्रा और कई दूसरे भाजपा नेताओं ने कुछ दस्तावेजों को कांग्रेस पार्टी की ‘टूल किट’ बताते हुए सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस ने कोरोना महामारी को संभालने में बदइंतजामी की बात फैला कर मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश रची।

कांग्रेस ने इस बारे में ट्विटर से शिकायत की थी और दावा किया था कि ये दस्तावेज फर्जी हैं। तथ्यों की जांच करने वाली एक स्वयंसेवी एजेंसी ने कांग्रेस के दावे को सच बताया। उसके बाद ट्विटर ने इस पोस्ट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ के रूप में टैग कर दिया था। इसी मामले में दिल्ली पुलिस ट्विटर के दफ्तरों में जाकर उसे नोटिस थमा दिया। जाहिर है, पुलिस को इसके लिए निर्देश कहीं ऊपर से मिला होगा। बहरहाल, जो लोग ऊपर बैठे हैं, उन्हें अगर ऐसा लगता है कि सरकार की आज जो छवि बिगड़ी है, वह किसी साजिश का परिणाम तो इस पर यही कहा जाएगा कि उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो। जब लाशें नदी में तैर रही हों और उसकी तस्वीरें दुनिया भर में सर्कुलेट हो रही हों, तो बदइंतजामी की बात बताने के लिए किसी साजिश की जरूरत है, इसे कोई शुतुरमुर्गी सोच का व्यक्ति ही सोच सकता है। बेशक टूलकिट जैसी बातें फैला कर सत्ताधारी जमात उनमें से बहुत से लोगों को भ्रमित रखते हुए अपने पक्ष में गोलबंद रख सकता है, जिन्हें इस महामारी के दौरान निजी क्षति ना हुई हो और जो सांप्रदायिक नफरत की भावना में विवेक खो चुके हों। लेकिन बाकी दुनिया ने अपनी आंखों से सच देखा है। उसे उस कांग्रेस पार्टी के टूलकिट की कोई जरूरत नहीं है, जो खुद अपना रास्ता नहीं तलाश पा रही है।

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