गहराता एक अहम रिश्ता

आप चाहें तो इसे भारत और चीन के बीच रिश्तों में बढ़ते तनाव के एक पहलू के रूप में समझ सकते हैं। हालांकि किन्हीं दो देशों के बीच गहराते रिश्तों का तीसरे देश से संबंध नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर उस रिश्ते से भू-राजनीतिक गोलबंदी का पहलू जुड़ा हो ऐसा होना हमेशा संभव नहीं रहता।

हम बात भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की कर रहे हैं। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की पहली वर्चुअल शिखर वार्ता हुई तो एशिया प्रशांत क्षेत्र में बनते नए समीकरणों पर फिर से ध्यान गया। ये दोनों वो देश हैं, जिनके अमेरिका से संबंध गहराते जा रहे हैं। दूसरी तरफ भारत और ऑस्ट्रेलिया का दोनों ही अलग- अलग मोर्चों पर चीन का टकराव बढ़ रहा है।

जहां भारत सीमा पर चीन के अतिक्रमण से जूझ रहा है, वहीं ऑस्ट्रेलिया पर चीन ने आर्थिक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इन दोनों देशों को जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत के लिए अमेरिका आमंत्रित किया है। गौरतलप है कि ट्रंप ने चीन के खिलाफ अपना रुख अब काफी आक्रामक कर रखा है।

गौरतलब है कि ट्रंप और मोदी के बीच हाल में फोन-वार्ता हुई। उसके तुरंत बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों में शिखर वार्ता हुई। इस घटनाक्रम ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच के इस संवाद को और महत्वपूर्ण बना दिया था। भारत- ऑस्ट्रेलिया- और जापान के साथ मिलकर अमेरिका हाल के वर्षों में चीन को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ा है। इसे चौगुट या क्वाड कहा जाता है।

तो इस चौगुटीय सहयोग के नजरिए से भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंध अहम हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के अलावा इंडो-पैसिफिक में समुद्री सहयोग पर भी सहमति की घोषणा भी हुई। सामरिक तौर पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहमति पिछले कई दशकों से रही है, लेकिन इसमें वैसी गहराई और पैनापैन नहीं था जैसा इन दोनों ही देशों का जापान के साथ रक्षा और सामरिक संबंधों में है।

लेकिन अब “पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट से संबंधित व्यवस्था” और रक्षा सहयोग के एमओयू से जुड़े रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग पर अमल से उस दिशा में काफी आगे बढ़ने की आशा है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच रक्षा अभ्यास बढ़ेगा जो एक बड़ा कदम है। चीन को ये बातें खटकेंगी। लेकिन भारत ने इस मामले में अपना रास्ता चुन लिया है।

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