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बात महाभियोग तक आ पहुंची

यह लगभग तय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर महाभियोग की कार्यवाही चलेगी। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में इस पर अंतिम मतदान होने वाला है? ट्रंप पर आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व उप राष्ट्रपति जो बाइडेन के खिलाफ जांच के लिए यूक्रेन की सरकार पर दबाव बनाया। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव मं  जो बाइडेन डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बनना चाहते हैं। साथ ही ट्रंप पर इस मामले में संसद की जांच में बाधा डालने का भी आरोप लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कुछ भी गलत करने से साफ इनकार किया है और उन्होने महाभियोग की जांच को ढकोसला करार दिया है। बहरहाल, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की न्यायिक कमेटी ने बीते हफ्ते 17 के मुकाबले 23 वोटों से ट्रंप के खिलाफ दो आरोपों की पु्ष्टि कर दी। अब प्रस्ताव को पूरे सदन के सामने पेश करने के लिए भेजा गया है। इसके बाद 658 पन्नों की पूरी रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें ट्रंप के खिलाफ पूरे मामले का ब्योरा है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी पूरी तरह से ट्रंप के साथ खड़ी है। उनका कहना है कि 2016 के चुनाव में ट्रंप की जीत से परेशान डेमोक्रेटिक पार्टी ने राजनीति से प्रेरित हो कर यह पूरा मामला खड़ा किया है। सदन के निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास अच्छी बहुमत है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि महाभियोग के आरोपों पर सदन में मुहर लग जाएगी। इसके लिए सामान्य बहुमत की ही जरूरत होती है और पार्टी पास 36 सीटें ज्यादा हैं। इसके बाद मामला रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा। जहां इन आरोपों की बकायदा जांच होगी और तय किया जाएगा कि क्या ट्रंप को उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए। बहरहाल अगर निचले सदन में आरोपों की पुष्टि हो जाती है तो महाभियोग हफ्ते भर चलने वाली सीनेट की सुनवाई के लिए जाएगा। अगर सीनेट महाभियोग की धाराओं को दो तिहाई बहुमत से पास कर देती है, तो राष्ट्रपति को दोषी करार दिया जाएगा और उन्हें पद छोड़ना होगा। मगर सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में 53 सीटें हैं यानी बहुमत उनके पास है। फिर यहां ट्रंप को हटाने के लिए यहां मौजूद सांसदों में से दो तिहाई का समर्थन जरूरी है। इसलिए उम्मीद है कि यहां सारी धाराएं खारिज कर दी जाएंगी और राष्ट्रपति आरोपमुक्त हो जाएंगे।

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