who malaria vaccine mosquito वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
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वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि

ये अफसोसनाक है कि मलेरिया आज तक एक जानलेवा बीमारी बना हुआ है। यह मादा एनाफेलीज मच्छर के काटने से होता है। अब तक इससे बचाव के लिए मच्छर मारने वाले स्प्रे या मच्छरदानी लगाने जैसे उपाय किए जाते रहे हैं। बहरहाल, अब पहली बार मॉस्कीरिक्स नाम से इसका टीका बना है।

मलेरिया का टीका बनना चिकित्सा विज्ञान की सचमुच बहुत बड़ी उपलब्धि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने उचित ही इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। गौरतलब है कि अफ्रीका में हुए परीक्षणों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बीते हफ्ते दुनिया की पहली मलेरिया वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि इस वैक्सीन से हजारों जानें हर साल बचाई जा सकेंगी। वैक्सीन को ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन नाम की कंपनी ने बनाया है। कई साल से जारी परीक्षणों के बाद मलेरिया वैक्सीन को मंजूरी मिली है। इसके परीक्षण अफ्रीका के कई देशों में हुए हैं, जहां हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी की भेंट चढ़ जाते हैं। वैक्सीन को मॉस्कीरिक्स नाम दिया गया है। डब्लूएचओ के मुताबिक इस वैक्सीन को अफ्रीका में अफ्रीकी वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। जाहिर है, उन वैज्ञानिकों पर दुनिया को गर्व है। इस वैक्सीन का इस्तेमाल मलेरिया रोकने के लिए उपलब्ध मौजूदा उपायों के साथ किया जाएगा। ये अफसोसनाक है कि मलेरिया आज तक एक जानलेवा बीमारी बना हुआ है। यह मादा एनाफेलीज मच्छर के काटने से होता है।

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अब तक इससे बचाव के लिए मच्छर मारने वाले स्प्रे या मच्छरदानी लगाने जैसे उपाय किए जाते रहे हैं। बहरहाल, मॉस्कीरिक्स में गंभीर मलेरिया को रोकने की क्षमता सिर्फ 30 प्रतिशत ही है। इसके लिए वैक्सीन की चार खुराकें लेनी होंगी। ये भी चिंता की बात है कि दवा से मिलने वाली सुरक्षा कुछ ही महीनों में खत्म हो जाएगी। बहरहाल, जब टीका बन गया है, तो उम्मीद जगी है कि धीरे-धीरे उसकी क्षमता में बढ़ोतरी होगी। फिर यह भी राहत की बात है कि इसके साइड इफेक्ट बहुत कम हैं। वैक्सीन का परीक्षण करने वाले वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस टीके को बनाना आसान नहीं था। लेकिन ये कामयाबी अब हासिल हो गई है। ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सिर्फ अफ्रीका में हर साल 20 करोड़ लोगों को मलेरिया होता है, जिनमें से चार लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। इनमें से अधिकतर पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं। 2019 में जितने लोग अफ्रीका में कोविड से मरे हैं, उससे ज्यादा लोग मलेरिया से मरे। ये तथ्य खुद जाहिर कर देते हैं कि ये वैक्सीन कितनी अहम भूमिका निभाएगी। अब अगली चुनौती इसके टीकाकरण अभियान के लिए अतिरिक्त धन जुटाने की होगी। जाहिर है ये काम सरकारों का है। वैज्ञानिकों ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है।

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