फिर हैरत क्या है?

ये ताजा खबर है। बेरोज़गारी की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस साल आधे से भी कम रोज़गार के अवसर सृजित हो सके हैं। श्रम एवं रोज़गार मंत्री संतोष गंगवार ने राज्यसभा में ये जानकारी दी। यानी ये आधिकारिक आंकड़ा है। उन्होंने बताया कि पीएमईजीपी के तहत वित्त वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय स्तर पर 5.87 लाख रोज़गार के अवसर पैदा हुए थे, जबकि 2019-20 में 31 अक्टूबर तक 2.11 लाख रोज़गार के अवसर ही पैदा हो सके। 2016-17 में सृजित हुए रोज़गार के अवसरों की संख्या 2017-18 में 4.07 लाख से घटकर 3.87 लाख रह गई। गौरतलब है कि इस साल जून में सरकार ने बेरोजगारी से जुड़े आंकड़ों को जारी किया था। उससे जाहिर हुआ कि देश में 2017-18 में बेरोज़गारी दर कुल उपलब्ध कार्यबल का 6.1 प्रतिशत रही, जो 45 साल में सर्वाधिक है। सरकार के जारी आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रोज़गार योग्य युवाओं में 7.8 प्रतिशत बेरोज़गार रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 5.3 प्रतिशत था।

इसी से जाहिर हुआ था कि राष्ट्रीय स्तर पर पर पुरुषों की बेरोज़गारी दर 6.2 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं के मामले में ये आंकड़ा 5.7 प्रतिशत है। अब ये ध्यानार्थ है कि प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की स्वरोज़गार योजना है। पीएमईजीपी के तहत उद्योग लगाने पर 25 लाख और सेवा क्षेत्र में निवेश करने पर 10 लाख रुपये कर्ज मिलता है। पीएमईजीपी के तहत लोन लेने पर सामान्य जाति के आवेदकों को लोन की रकम पर 15 प्रतिशत सब्सिडी और आरक्षित जाति के आवेदकों को 25 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। ग्रामीण इलाके में उद्योग लगाने पर सब्सिडी की यह रकम बढ़कर 25-35 फीसदी हो जाती है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में पिछले तीन वित्तीय वर्ष में पीएमईजीपी के तहत सृजित हुए रोज़गार के अवसरों की संख्या शून्य रही, जबकि 2016-17 में लक्षद्वीप में रोज़गार के 1398 अवसर सृजित हुए थे। चंड़ीगढ़ में 2019-20 में रोज़गार के सिर्फ 72 अवसर सृजित हो सके। 2018-19 में वहां 224 रोज़गार के अवसर पैदा हुए, जबकि 2017-18 में 360 और 2016-17 में यह संख्या 360 थी। यानी कुल मिलाकर रोजगार की संख्या में गिरावट आई। जब प्रधानमंत्री के नाम से चलने वाली योजना का यह हाल है, तो पूरी सूरत को समझा जा सकता है।

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