चीन से कब तक लुका-छिपी खेलेंगे?

क्या दुनिया के किसी संप्रभु देश के बारे में ऐसा सोचा जा सकता है कि उसका मालवाहक जहाज दूसरे देश में जाए और वहां की सरकार उस जहाज को समुद्र में खड़ा कर दे, सामान नहीं उतारने दे और जहाज के चालक दल के सदस्यों को एक तरह से बंधक बना कर रखे? चीन ने भारत के दो मालवाहक जहाजों के साथ ऐसा किया है। भारत का एक जहाज ‘एमवी जग आनंद’ 13 जून से चीन के हेबेई प्रांत के एक बंदरगाह पर खड़ा है, जिसमें चालक दल के 23 सदस्य हैं। दूसरा जहाज एमवी एनस्टेशिया 20 सितंबर से चीन के एक दूसरे बंदरगाह पर खड़ा है, जिसमें चालक दल के 16 सदस्य हैं। इस तरह भारत के जो मालवाहक जहाज और 39 लोग चीन में एक तरह से बंधक हैं और भारत क्या कर रहा है? भारत कुछ नहीं कर रहा है। एक जहाज तो छह महीने से खड़ा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता यह भी बताया है कि भारतीय मालवाहक जहाजों को कोरोना संक्रमण के खतरे के नाम पर रोका गया, जबकि उसके बाद आए कई दूसरे देशों के जहाजों को अपना माल उतार कर जाने दिया गया।

क्या भारत को चीन के इस कदम का मकसद समझ में नहीं आ रहा है? वह भारत को उसकी हैसियत दिखा रहा है। यह किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए शर्मिंदा होने का कारण है। इसी तरह से उसने भारतीय नागरिकों के चीन आने पर पाबंदी लगा रखी है। भारत को इसका भी जवाब देने की हिम्मत नहीं हुई। अब जाकर विमानन कंपनियों को अनौपचारिक रूप से कहा गया है कि वे चीन के नागरिकों को भारत की यात्रा नहीं करने दें। इसके जवाब में भारत क्या कर रहा है? चीनी कंपनियों के मोबाइल एप्स बैन कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इसी रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में विस्तार से देशों को लोगों को समझाया कि उन्हें कैसे अपनी जरूरत की चीजों की लिस्ट बनानी चाहिए औऱ यह देखना चाहिए कि उनमें कोई विदेशी उत्पाद न हो और दूसरी ओर प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में कोरोना वायरस का टीका लगाने के लिए जो सिरिंज भेजी गई है, वह विशेष ऑर्डर पर चीन से बन कर आई है। पिछले सात साल से गुजरात में लगभग सारे टीके चीन के बने सिरिंज से ही लगाए जा रहे हैं।

सवाल है कि चीन के साथ इस तरह लुका-छिपी का खेल कब तक चलता रहेगा? वह भारत के अपमानित करता रहेगा, सीमा में घुसने की कोशिश करता रहा है, जमीन हड़प लेगा, सीमा पर युद्ध की तैयारी करेगा, बुनियादी ढांचा बनाएगा, भारत के राज्यों पर अपना दावा करेगा और भारत को इतनी हिम्मत नहीं होगी कि तिब्बत, हांगकांग पर बयान दे सके? ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन की चिंता में दलाई लामा को जन्मदिन की बधाई देना बंद कर दिया! यह स्थिति इसके बावजूद है कि भारत सरकार को पता है कि चीन क्या कर रहा है। सरकार के नीति नियंता सार्वजनिक रूप से बता रहे हैं कि चीन भारत के साथ क्या कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कैसे चीन ने भारतीय जहाजों और भारतीयों को बंधक बनाया हुआ है। लेकिन भारत सरकार कुछ नहीं कर पाती है।

पिछले दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिमालय की सीमा पर बिना उकसावे वाली चीन की कार्रवाई से पता चल रहा है कि दुनिया कैसे बदल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन की कार्रवाई से पता चलता है कि किस तरह से समझौतों का उल्लंघन हो रहा और किस तरह से हिंद-प्रशांत में ताकत का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने चीनी फौजों का पूरी बहादुरी से मुकाबला किया। लेकिन यह सिर्फ फौज के मुकाबले का मामला नहीं है। जब चीन ऐसा कर रहा है और सरकार जान रही है तो सीधे चीन से दो टूक बात करनी चाहिए या उसे ऐसी चोट देनी चाहिए कि वह ऐसा करना बंद करे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे गतिरोध को लेकर पिछले दिनों कहा कि भारत की परीक्षा हो रही है। सवाल है कि भारत की परीक्षा हो रही है तो भारत जवाब क्यों नहीं दे रहा है? भारत को पता है कि चीन अपनी दक्षिण चीन सागर की नीति को हिमालय तक के आया है। जिस तरह उसने दक्षिण चीन सागर में धीरे धीरे अपने को मजबूत किया और अपना वर्चस्व स्थापित किया उसी तरह वह हिमालय के क्षेत्र में कर रहा है। वह ऐतिहासिक यारलंग जांगबो नदी पर पनबिजली परियोजना शुरू करने जा रहा है। वह ब्रह्मपुत्र के पानी का युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उसकी नजर भूटान पर है, सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सेंट्रल भूटान के आसपास सड़क और पुल बना रही है। वह डोकलाम में बंकर बना रहा है, गांवों तक में सड़कें बना रहा है, सीमा पर नए गांव बसा रहा है। भारत सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

पिछले दिनों अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एक बहादुर और साहसी राष्ट्रभक्त की तरह चीन को जवाब दिया और कहा है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा तिब्बत से मिलती है, चीन से नहीं। भारत की सरकार इस लाइन को क्यों नहीं आगे बढ़ाती है? क्यों नहीं वह वन चाइना पॉलिसी को चुनौती देता है? भारत क्यों नहीं ताइवान के साथ ब्राह्मोस मिसाइलों का सौदा करता है? हांगकांग में चल रहे लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का साथ देता है? कायदे से भारत सरकार को चीन पर आर्थिक कीमत लादनी चाहिए। उसे ऐसा आर्थिक झटका देना चाहिए, जिसे वह महसूस करे। जरूरी हो तो सैन्य अभियान की तैयारी करनी चाहिए। चाइनीज एप्स को बैन करना कोई समाधान नहीं है। सरकार को चीन से लुखा-छिपी खेलना बंद करना चाहिए और उसे दो टूक जवाब देना चाहिए।

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