परिस्थितियां बदलने के लिए परिणाम की प्रतीक्षा

आज महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम जहां राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक परिस्थितियों को बदलेंगे वहीं प्रदेश में झाबुआ विधानसभा के उपचुनाव के परिणाम की प्रतीक्षा भी बेसब्री से की जा रही है क्योंकि प्रदेश के दोनों ही दलों कांग्रेस और भाजपा पर इस परिणाम का असर होगा। मध्यप्रदेश में पिछले 10 महीनों से और जब से सत्ता परिवर्तन हुआ है तब से सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के बीच शह-मात का खेल चल रहा है।

अब तक दोनों ही दलों के अंदर विभिन्न प्रकार के राजनीतिक निर्णय को आगे बढ़ाया जाता रहा है लेकिन अब झाबुआ विधानसभा के परिणाम के बाद इन निर्णय पर अमल किया जा सकता है जो दीपावली के बाद दिखाई देंगे। जहां तक सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की बात है तो उसमें प्रदेशाध्यक्ष और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर निर्णय बहुत दिनों से नहीं हो पा रहे लेकिन अब निर्णय करने का दबाव रहेगा। ऐसे तो कोई भी मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के विस्तार को हमेशा आगे बढ़ाने में ही समझदारी दिखाता है जो अब तक मुख्यमंत्री कमलनाथ दिखाते आ रहे हैं लेकिन लगता है कि अब परिस्थितियां ऐसे निर्णय करने की आ गई है कि प्रदेशाध्यक्ष के पद को लेकर पार्टी में लंबे समय से घमासान चल रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर उनके समर्थक लगातार दबाव बनाए हुए हैं।

सिंधिया भी प्रदेश में सक्रिय भी हैं और परोक्ष रूप से सरकार पर निशाने भी साध रहे हैं जिससे सरकार और पार्टी उनकी और उनके समर्थकों की उपेक्षा को अब आगे ना बढ़ाए। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी सिंधिया पर बयान देकर कांग्रेस में नेताओं के बीच फूट डालने की कोशिश कर रही है लेकिन यदि आज झाबुआ विधानसभा का उपचुनाव कांग्रेस पार्टी जीतती है तो फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ पार्टी के अंदर और भी मजबूत बनकर उभरेंगे और मंत्रिमंडल विस्तार करने में उन्हें सुविधा होगी। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी पार्टी में उनकी राय को महत्व मिलेगा। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से लगातार रणनीति बना रहे और सत्ता व संगठन में अपनी गोटियां फिट कर रहे हैं। दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर एग्जिट पोल से उत्साहित भाजपा आज चुनाव परिणामों के बाद एक बार फिर से प्रदेश में उत्साह ही वातावरण बनाएगी और इसके लिए उसके नेता अपनी अपनी रणनीति बनाएंगे।

झाबुआ विधानसभा के उपचुनाव में यदि भाजपा को हार मिलती है तो फिर प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह पर पार्टी नेता दबाव बनाएंगे और संगठन चुनाव के माध्यम से नेतृत्व परिवर्तन की मुहिम भी शुरू हो सकती है लेकिन यदि भाजपा झाबुआ विधानसभा उपचुनाव जीतती है तो फिर प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह पार्टी में मजबूत बनकर संगठन चुनाव के माध्यम से दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनने की कोशिश करेंगे। कुल मिलाकर आज आने वाले चुनाव परिणाम राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर राजनीतिक दलों में परिस्थितियों को बदलने की प्रतीक्षा को तो खत्म करेंगे ही, भविष्य के लिए नई जमावट का रास्ता भी तैयार करेंगे।

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