नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने संभाला मोर्चा

दरअसल जितना ही कठिन चुनाव जीतना होता है उससे ज्यादा कठिन जीते हुए जनप्रतिनिधि को उसकी सदस्यता से वंचित करना होता है।

कई बार चुनावी याचिका में पूरे 5 साल गुजर जाते हैं लेकिन उच्चतम न्यायालय फैसला नहीं दे पाता कि चुनाव जीता विधायक सही तरीके से जीता है या गलत तरीके से,

क्योंकि किसी भी जनप्रतिनिधि को पद मुक्त करना बहुत ही कठिन कार्य है लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायकों की सदस्यता समाप्त करना सरपंची समाप्त करने से भी सरल हो गया है।

भाजपा शासनकाल में राकेश चौधरी और कल्पना परुलेकर की सदस्यता सदन के अंदर समाप्त की गई थी जिसे बाद में बहाल करना पड़ा। अब ऐसा ही कुछ भाजपा विधायक प्रहलाद पटेल के मामले में भी होने जा रहा है।

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नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने तब भी उत्साह नहीं दिखाया था और अब तो विधायकों के नेता होने के नाते उन्होंने विधायक प्रहलाद लोधी को न्याय दिलाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है।

बहरहाल सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव के बंगले पर दिनभर गहमागहमी रही।

जहां भाजपा नेताओं से गोपाल भार्गव चर्चा करते रहे वहीं मीडिया का भी जमावड़ा रहा।

गोपाल भार्गव ने शीतकालीन सत्र के पूर्व बीजेपी विधायक मामले को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा, विधानसभा में सचेतक नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री एवं विधायक विश्वास सारंग के साथ लंबी चर्चा की।

इस दौरान भार्गव के बंगले पर भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी भी मौजूद रहे। विधायक आकाश विजयवर्गीय भार्गव से मिलने पहुंचे। मीडिया से चर्चा करते हुए भार्गव ने कहा कि हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी है और 1 हफ्ते हो गए हाईकोर्ट का आदेश हुए।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन सरकार को करना चाहिए, जबकि निचली अदालत के फैसले पर 24 घंटे में कार्यवाही कर दी और हाईकोर्ट के फैसले को एक हफ्ते में पालन नहीं हो रहा है। यह पक्षपात है।

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भार्गव ने कहा कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है और बहुमत प्राप्त करने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में प्रहलाद लोधी भाग लेंगे। उन्हें विधानसभा की कार्यवाही से दूर रखना लोकतंत्र की हत्या है।

हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना कर रहे न्यायपालिका के आदेश का उल्लंघन विधानसभा की कार्रवाई से रोकने का अधिकार नहीं है। हम कोशिश करेंगे कि विधायक कार्रवाई में भाग ले।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव अब प्रहलाद लोधी मामले में सभी जरूरी पक्षों पर विषय विशेषज्ञों से भी चर्चा कर रहे हैं। हो सकता है वह विधायकों के साथ राज्यपाल से भी मिलें।

इस मामले में वे कांग्रेस को ना केवल कटघरे में खड़ा कर रहे हैं वरन भाजपा विधायक दल को भी एकजुट और सक्रिय कर रहे हैं। इस दौरान शीतकालीन सत्र की तैयारियों को लेकर विधायकों से बात कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ तमाम प्रकार के मुद्दे एकत्रित कर रहे हैं।

कुल मिलाकर विधानसभा के शीतकालीन सत्र को के पहले विपक्षी दल भाजपा प्रहलाद लोधी के मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पहल चाहते हैं कि वे हाईकोर्ट के निर्णय के आधार पर प्रहलाद लोधी के साथ न्याय करें।

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