मोदी-शाह की बीजेपी में ‘साध्वी’ आउट ऑफ कंट्रोल ..? - Naya India
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मोदी-शाह की बीजेपी में ‘साध्वी’ आउट ऑफ कंट्रोल ..?

संविधान दिवस के बाद जब देश की नजर हिंदुत्व-राष्ट्रवाद की राजनीति करने वाले भाजपा से दोस्ती तोड़ कर महाराष्ट्र में सरकार बनाने जा रहे शिवसेना पर है। जिसने भगवा को आगे रखकर कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से मोदी और शाह की भाजपा को सीधी चुनौती देकर गठबंधन की सियासत को एक नई दिशा देने की ठानी है।

तब संसद के अंदर से प्रखर राष्ट्रवाद की पैरोकार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने एक बार फिर मोदी-शाह की भाजपा को परेशानी में डाल दिया। साध्वी ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताकर उस पुरानी बहस को हवा दी, जिससे भाजपा और संघ पहले ही पल्ला झाड़ चुके हैं,

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भाजपा प्रवक्ता पीवीएल नरसिम्हा ने इसे संसद का ही नहीं, भाजपा का भी अपमान बताया है। तो संदेश यही गया कि इस बार साध्वी के खिलाफ भाजपा जल्द कार्रवाई करेगी। यह बयान उस वक्त आया , जब कांग्रेस-एनसीपी के पाले में जाकर खड़ी हो चुकी शिवसेना के हिंदुत्व को लेकर भाजपा सवाल खड़े कर रही है।

ऐसे में साध्वी ने गोडसे को देशभक्त संसद के अंदर बताया। लोकसभा के रिकॉर्ड से इस बयान को निकाल दिए जाने के बावजूद सड़क की सियासत में सवाल एक साथ कई खड़े हो चुके हंै। प्रज्ञा को पार्टी स्तर पर नसीहत, मशविरा और चेतावनी पहले भी दी जा चुकी है, बावजूद इसके साध्वी के सख्त आक्रामक तेवर के साथ गोडसे के प्रति उनकी सोच नहीं बदली।

जो कहीं ना कहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायियों को अब रास नहीं आ रही। तो सवाल इस बार गोडसे को देशभक्त यदि संसद के अंदर बताया गया तो क्या कार्रवाई संसद की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए करने का मार्ग प्रशस्त होगा, या फिर एक बार फिर बात आई गई हो जाएगी। इससे पहले मीडिया के मार्फत सार्वजनिक तौर पर प्रज्ञा अपनी गोडसे भक्ति का संदेश दे चुकी हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि देश भाजपा से अब यह जानना चाहता है कि वह गांधी के साथ है या फिर गोडसे के साथ। उन्हें अब यह स्पष्ट करना चाहिए।

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यदि वह गांधी के साथ है तो गांधी के हत्यारे का महिमामंडन करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई अविलंब करे। कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद दिलाया कि दिल से कभी माफ नहीं करने की बात कहने वाले मोदी को अब लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद में इसी बयान को दोहराने पर प्रज्ञा ठाकुर को फिर माफ नहीं करना चाहिए। भाजपा विरोधी नेता जिस तरह प्रज्ञा के बयान को आधार बनाकर मोदी और शाह पर कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं क्या संसद सत्र के चलते प्रधानमंत्री कोई सख्त फैसला लेने के लिए मजबूर होंगे। प्रज्ञा साध्वी हैं और उनके विवादित बयानों के साथ भगवा वस्त्र दूसरे सांसदों के बीच आकर्षण का केंद्र बनता रहा है।

प्रज्ञा ने खुद को हिंदुत्व का पैरोकार साबित कर राजनीति में अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है। आतंकवाद जैसे मुद्दे पर प्रज्ञा के विवादित बयानों को ध्यान में रखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने ही नहीं, बल्कि संघ ने भी हस्तक्षेप कर उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन बंद कमरे का यह मशविरा प्रज्ञा की सोच नहीं बदल पाया है। जब भाजपा महाराष्ट्र में अपने साथी शिवसेना जो प्रखर हिंदुत्व की राजनीति करती रही, से दोस्ती तोड़ चुकी है। सवाल खड़ा होता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने प्रज्ञा को दिल से माफ नहीं करने की बात कही थी, आखिर कब तक प्रज्ञा जैसे सांसद को सबक सिखाने की बजाय चुप्पी साधे रहेंगे।

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नरेंद्र मोदी जिन्होंने धारा 370 की गुत्थी सुलझा ली तो राम मंदिर पर देश में माहौल नहीं बिगड़ने दिया, आखिर मोदी को साध्वी सीधी चुनौती देती हुई क्यों नजर आ रही हैं। अमित शाह जिन्होंने प्रज्ञा की लोकसभा चुनाव में खुलकर पैरवी की, आखिर साध्वी उनके सम्मान पर सवाल क्यों खड़ा कर रही हैं। जेपी नड्डा जिन्होंने बंद कमरे में बुलाकर साध्वी प्रज्ञा को कड़ी चेतावनी दी थी। आखिर प्रज्ञा उनकी गाइडलाइन को क्यों नजरअंदाज कर रही है।

संघ कहीं ना कहीं जिसने साध्वी को भोपाल से चुनाव जिताने में बड़ी भूमिका निभाई और संरक्षण दिया, उसका महात्मा गांधी प्रेम क्या साध्वी को रास नहीं आ रहा। क्या भाजपा द्वारा साध्वी को चुनाव लड़ाकर संसद में पहुंचाना एक गलत फैसला था तो अपने इस फैसले को भाजपा कैसे दुरुस्त करेगी, जबकि अनुशासन ही नहीं, सिद्धांत को भी साध्वी संसद के अंदर धता बता चुकी हैं। क्या इसे भाजपा के निष्ठावान और प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर सेलिब्रिटी और दूसरी शख्सियतों को भाजपा में रातों-रात प्रतिष्ठा से नवाजे जाने के कारण ही यही स्थिति निर्मित हुई है।  क्या साध्वी को भाजपा, मोदी और शाह के संरक्षण की आवश्यकता नहीं है या फिर पर्दे के पीछे शह और संरक्षण के चलते साध्वी के हौसले बुलंद हैं।

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बड़ा सवाल उद्धव ठाकरे और शिवसेना से रिश्ते तोड़ लेने के बाद भाजपा क्या साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का साहस जुटा पाएगी। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर यानी भोपाल से भाजपा सांसद जो दिग्विजय सिंह जैसे नेता को चुनाव हराकर लोकसभा में पहुंचीं। मालेगांव ब्लास्ट के कारण सुर्खियों में आई साध्वी, जिन्होंने संघ के वैचारिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सीढ़ियां चढ़कर सीधे भाजपा का टिकट हासिल कर चुनाव जीता और देश में भगवा धारियों की सियासत करने वाला एक बड़ा चेहरा बनकर सामने आई, जिनके बयान विवादों को हवा देते रहे।

देश के गृह प्रदेश मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से चुनाव लड़कर भाजपा ने हिंदुत्व के पैरोकारों को लामबंद कर लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर खूब भुनाया। एक बार फिर साध्वी चर्चा में तो उसकी वजह सांसद के तौर पर संसद के अंदर नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताना। जिस पर हंगामा ऐसा बरपा कि भाजपा का समूचा नेतृत्व सवालों के घेरे में आकर खड़ा हो गया। विपक्षी दल और नेता यदि साध्वी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने पर मोदी और शाह को पानी पी पीकर कोस रहे तो डैमेज कंट्रोल के लिए मजबूर भाजपा को नए सिरे से यह भरोसा दिलाना पड़ रहा है कि प्रज्ञा के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूर की जाएगी।

यह पहला मौका नहीं है, जब प्रज्ञा ने भाजपा नेतृत्व को संकट में डाला और विरोधियों को मोदी-शाह पर हमला करने का मौका दे दिया.. साध्वी लोकसभा चुनाव के दौरान पहले भी कह चुकी हैं कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन से प्रज्ञा को माफ नहीं करने की बात कह चुके। लेकिन पार्टी ने उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया।

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यही नहीं, मोदी की मौजूदगी में अमित शाह ने प्रज्ञा को कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात जरूर कही, लेकिन इसके बाद भी साध्वी के बयान भाजपा नेतृत्व को आरोपों के कठघरे में खड़ा करते रहे। बावजूद इसके पिछले दिनों बतौर सांसद संसद की रक्षा समिति में उन्हें शामिल किया गया। तब भी खूब बवाल मचा था।

इससे पहले मोदी के मिशन स्वच्छता अभियान पर यह कहकर साध्वी ने सवाल खड़ा कर दिया था कि एक सांसद का काम झाड़ू लगाना नहीं है।जबकि प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर भाजपा के सांसद, विधायक, मंत्री स्वच्छता अभियान में जोर-शोर से हिस्सा लेते हैं। बुधवार को लोकसभा में एसपीजी बिल पर डिबेट के दौरान प्रज्ञा ठाकुर ने ये बयान दिया। बुधवार को लोकसभा में एसपीजी संशोधन बिल पर डीएमके सांसद ए राजा अपनी राय रख रहे थे।

इस दौरान ए राजा ने गोडसे के एक बयान का जिक्र किया, जिसमें गोडसे ने कहा था कि उसने बापू को क्यों मारा था। जब ए राजा बोल रहे थे उसी समय प्रज्ञा ठाकुर ने उन्हें टोका और कहा कि एक देश भक्त का उदाहरण नहीं दिया जा सकता है। प्रज्ञा ने कहा, देशभक्तों का नाम नहीं लेंगे आप। प्रज्ञा के इस बयान पर सदन में जमकर शोर-शराबा हुआ। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान को लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया।

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