शाह से निपटना कांग्रेस के बस में नहीं

अमित शाह की एक विशेषता है कि वह संसद में बोलते हुए अपनी विचारधारा की बात को डंके की चोट पर खुल कर कहते हैं। सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश करते हुए जब कांग्रेसी सदस्य टोका-टोकी कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं किया होता , तो यह बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती।

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस किसी भी मुद्दे पर अपनी बात सोच विचार कर नहीं रख पाती। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन हमेशा जल्दबाजी में रहते हैं , वह उन विषयों पर भी टोका टोकी करते रहते हैं , जिन विषयों पर या तो उन को कोई जानकारी नहीं होती या आधी अधूरी और कई बार तो गलत जानकारी होती है। इसलिए वह अनेक बार कांग्रेस जैसी महान पार्टी की किरकिरी करवा चुके हैं।

जब कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान खत्म किए जा रहे थे तो उन्होंने कह दिया था कि संसद को यह अधिकार ही नहीं है क्योंकि कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय विवाद का मुद्दा है। कुछ वैसी ही बात अधीर रंजन चौधरी ने नागरिकता संशोधन बिल पर भी कही , उन्होंने कहा कि संसद को इस बिल पर विचार करने का कोई हक नहीं क्योंकि यह संविधान की प्रस्तावना का उलंघन करता है। अमित शाह की कांग्रेस को धो धो कर मारने की आदत है, वह गलती कर रहे कांग्रेसी सांसदों को गलती दोहराते रहने के लिए उकसाते हैं और बाद में हमला बोल देते हैं। सोमवार को भी यही हुआ , जब उन्होंने भारत के तीन पडौसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का जिक्र किया तोअधीर रंजन की दो बचकानी टिप्पणियाँ थी , पहली यह कि नेपाल भी भारत का पड़ोसी देश है , हालांकि भूटान, म्यांमार और चीन भी पडौसी देश हैं , लेकिन जब वह बात तीन पडौसी मुस्लिम देशों की कर रहे थे तो नेपाल का जिक्र करना बचकानी बात ही थी । इतना क्या कम था कि उन्होंने अमित शाह की इस बात पर खिल्ली उड़ा दी कि अफगानिस्तान तो भारत का पडौसी देश नहीं है और गृह मंत्री को भारत का भूगोल भी मालूम नहीं।

अमित शाह ने अपनी आदत के अनुसार अधीर रंजन और बाकी कांग्रेसियों को न सिर्फ यह बात दोहराने दी , बल्कि दो बार बोला कि भारत की 106 किलोमीटर सीमा अफगानिस्तान से लगती है। अगर कांग्रेस के सदस्यों का प्रेजेंस आफ माईंड होता तो इसी बात पर उन्हें अपनी गलती का एहसास हो जाता पर कांग्रेसी उन की खिल्ली उड़ाते रहे, तब उन्होंने सामने बैठी सोनिया गांधी का जिक्र किए बिना कहा कि वह इसी देश के रहने वाले हैं और इस देश के भूगोल को जानते हैं।

अंत में उन्होंने यह कह कर कांग्रेस को शर्मिंदा कर दिया कि ये लोग पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का हिसा नहीं मानते। असल में पाक अधिकृत कश्मीर की 106 किलोमीटर सीमा अफगानिस्तान से लगती है , जिस पर पाक का बलात कब्जा है। नरसिंह राव के शासन काल के समय भारत की संसद यह प्रस्ताव पास कर चुकी है कि पीओके भारत का हिस्सा है और उसे वापस लेना है।

अमित शाह ने तीनों देशों के संविधानों के अनुच्छेद 2 का हवाला देकर बताया कि ये तीनों इस्लामिक देश हैं और इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों का धार्मिक आधार पर उत्पीडन हो रहा है, इसलिए हिन्दुओं , ईसाईयों और पारसियों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया जा रहा है । 1950 में नेहरु-लियाकत समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस में दोनों देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी दी गई थी , जहां भारत ने इस समझौते का ईमानदारी से पालन किया , और मुस्लिम फलफूल रहे हैं , वहीं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर धार्मिक आधार पर इतने अत्याचार हुए हैं कि वे बड़ी तादाद में भाग कर भारत आ चुके हैं। इसी तरह बांग्लादेश में अभी भी हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं।

गृह मंत्री ने बिल पेश करते हुए दो बातें साफ़ की हैं , पहली तो यह कि पूर्वोतर के राज्यों में उन का संरक्षण बरकरार बरकरार रहेगा , 371 का अनुपालन जारी रहेगा। इसी तरह बिल में मुस्लिमों को प्रतिबंधित नहीं किया गया है, जैसे पहले नियमोंनुसार आवेदन करने वालों पर विचार किया जाता है , वैसे ही अभी भी जारी रहेगा। हालांकि उन्होंने अदनान सामी का जिक्र नहीं किया , लेकिन पाकिस्तान के मुस्लिम नागरिक अदनान सामी को मोदी राज में ही भारतीय नागरिकता दी गई थी। भारी टोका-टाकी के बीच 293 सांसदों के समर्थन और 82 सांसदों के विरोध से नागरिकता संशोधन संशोधन बिल लोकसभा में पेश हो गया।

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