सेना का स्वरूप बहुत बदल जाएगा

भारत की सशस्त्र सेनाएं ऐसा लग रहा है कि संक्रमण के दौर से गुजर रही है। जाने अनजाने में सेना का मूलभूत स्वरूप बदल रहा है। एक तरफ तीनों सेनाओं में बेहतर तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस का पद बना कर उस पर पहले सीडीएस की नियुक्ति हुई है तो दूसरी ओर सर्वोच्च अदालत ने सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने यानी पुरुषों की बराबरी का पद देने और सैन्य मोर्चे पर तैनाती का आदेश देकर दशकों से चला आ रहा भेदभाव खत्म किया है। इन दोनों फैसलों से भारतीय सेना का स्वरूप बहुत बदल जाएगा। कई बुनियादी चीजें बदल जाएंगी।

यह महज संयोग है कि इन दोनों बातों का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ऐतिहासिक लाल किले से अपने भाषण में किया था। उन्होंने 15 अगस्त 2018 को दिए भाषण में महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन देने की बात कही थी और 15 अगस्त 2019 को सीडीएस की नियुक्ति का वादा किया। दूसरा वादा उन्होंने पहले पूरा किया और पहले वादे पर अमल का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है।

सीडीएस की नियुक्ति से सेना के कामकाज में जो बदलाव होना है वह दिखना शुरू हो गया है। पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने सेना की नई रूपरेखा का खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि नई स्टूडियो कमान बनाई जा रही है। सेना में एक पेनिनसुलर कमान भी बनाई जा रही है। सेना के लिए होने वाली खरीद और इससे जुड़े तमाम सौदों के देखने के लिए भी एक कमान होगी। इस तरह सेना में कमान के स्तर पर कई किस्म के बदलाव किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इनसे तीनों सेनाओं में बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा और प्रशिक्षण आदि का काम भी ज्यादा बेहतर ढंग से हो पाएगा।

यह बदलाव चल ही रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया। असल में यह कोई नया आदेश नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह आदेश 2010 में दिया था। सोचें, दस साल पहले यह कहा गया था कि लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता है। सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक भी नहीं लगाई थी। इसके बावजूद महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का मामला अटका रहा। इससे साफ दिख रहा है कि सेना के अंदर और सरकार में भी पूर्वाग्रह कितने गहरे हैं। अगर स्वाभाविक रूप से भेदभाव की सोच नहीं होती तो हाई कोर्ट के आदेश पर अमल किया गया होता। इस समय सरकार की ओर से इसका स्वागत किया जा रहा है पर यह हकीकत है कि इसके लिए सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया। अब उम्मीद की जा सकती है कि महिलाओं को स्थायी कमीशन देने और अग्रिम सैन्य मोर्चे पर उनकी तैनाती का रास्ता खुल जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले और सरकार की ओर से इस पर अमल करने की मंशा जाहिर किए जाने के बाद अब यह उम्मीद की जा सकती है कि एक दिन कोई महिला अधिकारी सेना प्रमुख बनेगी, एयर चीफ मार्शल बनेगी, नौसेना प्रमुख बनेगी और अंततः किसी दिन तीनों सेनाओं की प्रमुख बनेगी। यह उम्मीद अपने आप में देश और भारतीय समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव को खत्म करने के लिए बहुत बड़ी बात है। अब तक महिलाएं सेना में बहादुरी की कई भूमिकाएं निभा चुकी हैं और पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों में उनकी बहादुरी की कहानियां देश जानता है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले दस महिला अधिकारियों की बहादुरी के किस्से सुने। उसके बाद अदालत ने सरकार की सोच पर भी अफसोस जाहिर किया।

सरकार की ओर से आपत्तियों में कहा गया था कि महिलाएं मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर होती हैं और उनको लेकर कई तरह की सामाजिक धारणाएं भी हैं। सामाजिक धारणाओं की व्याख्या में यह कहा जा रहा था कि पुरुष जवान या सैन्य अधिकारी किसी महिला अधिकारी से आदेश लेने में हिचकते हैं। सोचें, यह कैसी मानसिकता है। इस देश में एक महिला लंबे समय तक प्रधानमंत्री रही है अभी हाल तक एक महिला देश की रक्षा मंत्री थी, जिससे सेना के तीनों प्रमुख आदेश लेते थे। महिला रक्षा मंत्री से आदेश लेने में सेना प्रमुखों को दिक्कत नहीं है पर सेना के जवानों के महिला अधिकारी से आदेश लेने में दिक्कत होगी! यह कितनी हैरान करने वाली बात है!

बहरहाल, इन तमाम दलीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने और वे सारे अधिकार देने का आदेश दिया है, जिससे लैंगिक भेदभाव पूरी तरह से खत्म हो। सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बदलाव के साथ साथ इससे महिला अधिकारियों के जीवन में क्या बदलेगा यह भी देखना जरूरी है। अब तक महिलाओं को शॉर्ट सर्विस कमीशन मिलता था और उनकी नियुक्ति मेडिकल, सिगनलिंग, इंजीनियरिंग आदि के कामों में होती थी। शॉर्ट सर्विस कमीशन मिलने की वजह से रिटायर होने के समय महिला अधिकारियों की पेंशन नही बहाल हो पाती थी। हालांकि 1992 से चल रहे मुकदमे के बीच कई चीजें बदली थीं और टुकड़ों टुकड़ों में सुधार हुए थे पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से एक झटके में सारी चीजें बदल जाएंगी। अब महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलेगा, सैन्य मोर्चों पर तैनाती मिलेगी, पेंशन मिलेगी और वे सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती हैं। सबसे बड़ा बदलाव वायु सेना में आएगा। थल सेना और नौसेना में महिला अधिकारियों की संख्या तीन-चार फीसदी है, पर वायु सेना में 13 फीसदी महिलाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू होने का असर समाज के बाकी क्षेत्रों में भी दिखेगा।

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