महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री तो शिवसेना का ही बनेगा

ऋषिराज
महाराष्ट्र में सरकार को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा है। बुधवार को शिवसेना सांसद और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने एक इंटरव्यू में कहा था- ‘‘वह (फड़णवीस) चाहें तो कल ही डिप्टी सीएम बन सकते हैं। आधी सदी से हम विरोध झेल रहे हैं, लेकिन आज तक किसी को खत्म करने की भाषा बोलने वाला नहीं मिला। इन्हें (फडणवीस) शिवसेना को खत्म करना है। शिवसेना को ही नहीं, बल्कि विरोधियों समेत मित्रों को भी खत्म करना है। खुद की पार्टी में चुनौती बन रहे नेताओं को खत्म करना है। अहंकारी का अहंकार उतारने का यही उचित समय है।

भाजपा के साथ गठबंधन के सवाल पर राउत ने कहा, ‘‘कैसा गठबंधन? सीटों के बंटवारे में उन्होंने हमें कम सीटें दीं। 25 सीटें ऐसी थी, जहां जीतने की संभावना ही नहीं थी। बाकी जगहों में से 32 सीटों पर इनके बागियों ने हमें हराया। क्या आप इसे गठबंधन कहते हैं? इसी वजह से भले ही वे अपने शब्द भूल गए हों, हम उन पर मजबूती से कायम हैं। सत्ता में हमें बराबरी से हिस्सा चाहिए।

शरद पवार के साथ बैठक पर राउत ने कहा, ‘‘बैठक क्यों नहीं होनी चाहिए? महाराष्ट्र में कुछ भी होना हो तो शरद पवार महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। उनके पास कितने विधायक हैं, यह छोड़ दो। पवार के बिना राज्य की राजनीति की कल्पना ही नहीं की जा सकती। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम जैसा शब्द पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही दिया था। राष्ट्रपति शासन के बजाय राज्य के हित में विपरीत विचारों वाली पार्टियों को भी साथ लाया जा सकता है।

ये तल्ख तेवर बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहे हैं। भाजपा की हवा खिसकी हुई है। इसके बावजूद भाजपा-शिवसेना के गठबंधन को किसी भी तरह बरकरार रखने के पुरजोर प्रयास जारी हैं। नेताओं के मीडिया के समाने बयान कुछ और हैं, रणनीति कुछ और। महाराष्ट्र का राजनीतिक घटनाक्रम अत्यंत रोचक हो रहा है, जिसमें आश्चर्यजनक रूप से मीडिया ज्यादा रुचि नहीं ले रहा है। सरकार बनने के संकेत गुरुवार शाम को भी नहीं मिले। इस बीच शिवसेना विधायकों की बाड़ा बंदी हो गई। सुबह बांद्रा में मातोश्री पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ विधायकों की बैठक हुई। उसके बाद सभी विधायकों को बांद्रा के एक होटल में भेज दिया गया। बैठक एक घंटा चली। बैठक में उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम भाजपा से गठबंधन तोड़ने का इरादा नहीं रखते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक औपचारिक और मीडिया के लिए जारी बयान है।

बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में संजय राउत ने कहा कि पार्टी की भूमिका बदली नहीं है। अंतिम फैसला उद्धवजी लेंगे। महाराष्ट्र के लोग चाहते हैं कि सरकार जल्द बने। अगर भाजपा दावा करती है कि गठबंधन की सरकार होगी तो वह सरकार बनाने का दावा क्यों नहीं करती? भाजपा के विधायक राज्यपाल से मिलने के बाद खाली हाथ क्यों लौटे? स्पष्ट है, वे बहुमत नहीं जुटा पा रहे हैं। अगर बहुमत नहीं है तो जनता के सामने आकर बताइए कि हम सरकार नहीं बना रहे। संविधान का हर पेज हमें मालूम है। संविधान किसी की जागीर नहीं है। गुरुवार को भाजपा के विधायकों ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में शिवसेना ने लिखा है, कुछ लोग नए विधायकों से संपर्क कर थैली की भाषा बोल रहे हैं। पर किसानों के हाथ कोई दमड़ी भी रखने को तैयार नहीं है। राज्य में मूल्य विहीन राजनीति हम नहीं चलने देंगे। इसके लिए शिवसैनिक तलवार लेकर खड़े हैं। राउत ने कहा- भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। अगर वह सरकार बनाती है तो हम देखेंगे कि आगे क्या करना है। राकांपा प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि भाजपा-शिवसेना राज्य में सरकार बनाएं। हमें जनता ने विपक्ष के लिए चुना है, हम विपक्ष में ही बैठेंगे। मेरे पास अभी कहने के लिए कुछ नहीं है। भाजपा-शिवसेना को लोगों का जनादेश मिला है, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द सरकार बनानी चाहिए। हमारा जनादेश विपक्ष की भूमिका निभाना है।

मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने बुधवार रात नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत से लंबी बातचीत की और उन्हें महाराष्ट्र की परिस्थितियों से अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार संघ प्रमुख ने सलाह दी है कि सरकार बनाने के लिए तोड़फोड़ करने की जरूरत नहीं, विपक्ष में बैठने के लिए तैयार रहना चाहिए। फड़नवीस का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है। गुरुवार को नागपुर पहुंचे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एयरपोर्ट पर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा- मैं दिल्ली में ही खुश हूं और वहीं अपना काम जारी रखूंगा। मेरे महाराष्ट्र वापस आने का सवाल ही नहीं है। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस जी के नेतृत्व में ही सरकार बनेगी। गडकरी की भी भागवत से लंबी मुलाकात की खबर है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में सरकार के गठन से संघ का कोई लेना-देना नहीं है। राज्य में जल्द ही सरकार पर फैसला होगा। शिवसेना से बातचीत जारी है। इस पूरे घटनाक्रम में एक बात तय है कि शिवसेना मुख्यमंत्री पद से कम पर समझौते के लिए तैयार नहीं है। चाहे भाजपा समर्थन दे या रांकांपा-कांग्रेस। शिवसेना इस समय किंग मेकर की भूमिका में है।

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