एजेण्डे पर आगे बढ़ती भाजपा का मार्ग प्रशस्त..?

ओमप्रकाश मेहता

देश पर राज कर रही भारतीय जनता पार्टी चाहे पिछले छियासठ महीनों के शासनकाल में जनता से जुड़े चुनावी वादे पूरे न कर पाई हो, किंतु राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक वादों की पूर्ति की दिशा में सफल व सशक्त कदम आगे बढ़ाकर अपना भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया है।

यद्यपि छियासठ में से साठ महीनों में मोदी सरकार ने सिर्फ देश की नब्ज टटोल कर उसकी बीमारी जानने की ही कौशिशें की, किंतु छः महीने पहले पुनः सत्ता में आई मोदी सरकार ने अपने पांच साला मनन को, जो मूर्तरूप देना शुरू किया तो भाजपा का सत्ता मार्ग और प्रशस्त हो गया और तीन तलाक जैसी सामाजिक कुप्रथा के खात्में से शुरू हुआ यह चक्रवर्ती दौर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 व 35ए की विदाई के बाद रामजन्म भूमि विवाद की इतिश्री के कगार पर आ पहुंचा है, अभी मोदी सरकार के साढ़े चार साल अर्थात चौपन महीने शेष हैं।

इसे भी पढ़ें :- निर्णय में कुछ विसंगतियां

इस अवधि में न सिर्फ राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा, बल्कि एनआरसी के डण्डे से घुसपैठियों की वापसी जैसे कई अहम राष्ट्रीय मसले हल हो जाएंगे। अब यदि तीन तलाक, जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति और राम जन्म भूमि विवादों के हल को किसी एक विशेष सम्प्रदाय से जोड़कर देखा जाए तो इसे छुद्ध मानसिकता ही कहा जाएगा, बल्कि इन कदमों को उसी सम्प्रदाय विशेष के हित के नजरिये से देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह सम्प्रदाय विशेष (मुस्लिम) भी स्वतंत्र भारत के नागरिक है, जहां हर वर्ग के नागरिक को समानता का अधिकार प्राप्त है, और सरकार ने उनके हित में कोई फैसला लिया है तो उसे व्यापक हित के रूप में देखा जाना चाहिए।

तीन तलाक मुस्लिम वर्ग में एक अभिशाप के रूप में जाना जाता रहा है, जहां महिलाओं को पुरूष की दासी के रूप में देखा जाता रहा और पुरूष वर्ग की स्वेच्छाचारिता इस कुप्रथा से जुड़ी रही, इसलिए इस वर्ग विशेष की आधी आबादी के हित में यदि सरकार ने सोचा तो क्या गलत किया? इसी तरह जम्मू-कश्मीर जो आजादी के बाद से ही आजाद भारत में कुछ अलग-थलग नजर आ रहा था, वह भी कुछ बुजुर्ग नेताओं की गलती के कारण, तो उस गलती को सुधार कर देश के अन्य राज्यों के समकक्ष यदि सरकार ने खड़ाकर दिया तो कौनसा अपराध कर दिया? आज इस कदम की आलोचना करने वालों को ज्यादा नहीं एक दशक में ही सरकार के इस साहसिक कदम की तारीफ करने को मजबूर होना पड़ेगा।

इसे भी पढ़ें :- मंदिर ही है भारत की सच्चाई!

अब रही बात तीसरे महत्वपूर्ण सपने को साकार होने की। हर देशवासी की यह महत्वकांक्षा थी कि अपनी ही अयोध्या नगरी में कई वर्षों से तम्बू में विराजे रामलला को एक व्यवस्थित व भव्य आवास उपलब्ध हो, यही पूरे देश का हर आम व खास भी चाहता था, स्वयं वे भी जो राम के कभी पूजक नहीं रहे, उन्हें अपने आराध्य के लिए जगह चाहिये थी। पहले रामजी ने अपनी इस भावना से देश के हिन्दूओं को अवगत कराया और बाद में प्रजातंत्र के एक महत्वपूर्ण स्तंभ न्याय पालिका को सद्बुद्धि प्रदान की, और उसीका यह प्रतिफल है

कि हिन्दुओं के साथ समस्त देशवासियों की चाहत और भगवान राम की मनोकामना न्याय पालिका ने चार सौ सालों से अधिक लम्बे विवाद को एक झटके में हल कर हर किसी के आराध्य भगवान को एक विशाल आवास (मंदिर) उपलब्ध कराने की शुभज्ञा प्रदान कर दी साथ ही मुस्लिम भाइयों के आराध्य के लिए भी आराधना (नमाज) हेतु मस्जिद हेतु अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के आदेश प्रदान कर दिए, इस प्रकार भगवान राम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि ‘होई है वही जो राम रुचि राखा।’

इसे भी पढ़ें :-इमरान ने मौका खोया

अब इस बड़ी सफलता के बाद देश में सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ वाचाल नेता काशी और मथुरा की बात कर रहे है, जहां हिन्दूओं और मुस्लिमों दोनों के संयुक्त आराधना स्थल है, इन दोनों स्थलों का इतिहास भी खोजा जा रहा है और अपने राजनीतिक हित को ढूंढ़ा जा रहा है, किंतु फिलहाल सरकार पर विराजित माननीयों की नजर इस तुच्छ राजनीति पर नहीं होकर उनकी नजर राष्ट्र को बाहरियों से मुक्त करने की ओर केंद्रित है, इसीलिए गृहमंत्री अमित शाह पूरे देश में एनआरसी लागू करने की पहले ही मंशा प्रकट कर दी है।

इस प्रकार कुल मिलाकर केन्द्र की सत्ता मंे विराजित भारतीय जनता पार्टी अपने नित नए सार्थक कदमों से अपने भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती जा रही है और जहां तक प्रतिपक्षी दलों का सवाल है, वे सरकार के नित नए कदमों से हतप्रभ होने के साथ स्वयं के अस्तित्व को बचाने की दिशा में चिंतित भी है। अब आगे किसका क्या हश्र होता है? यह तो भविष्य के गर्भ में है, किंतु यह अब जरूरी हो गया है कि कांग्रेस सहित अन्य प्रतिपक्षी दल अब तक की अपनी विरोध की नीति की समीक्षा करें और जनहित में भाजपा सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का स्वागत कर जनता की सहानुभूति बटोरें, यही एक श्रेष्ठ मार्ग है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares