महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने की संभावना

ऋषिराज
मुंबई। महाराष्ट्र में भाजपा सरकार नहीं बना रही है। पूरी संभावना है कि शिवसेना

प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने वाले हैं।

मुंबई में उद्धव ठाकरे की तस्वीरों वाले पोस्टर लग चुके हैं

और नई सरकार बनाने की गहमागहमी शुरू हो गई है।

इस बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था।

इस संबंध में रविवार को दिन भर भाजपा नेताओं की मैराथन बैठकें चलती रहीं।

उसके बाद शाम को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस ने भाजपा के फैसले के बारे में राज्यपाल को सूचित किया।

इसके साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि शिवसेना ने जनादेश का अनादर किया है।

वह अगर राकांपा के साथ सरकार बनाना चाहती है तो इसके लिए शुभकामनाएं।

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समझा जाता है कि फड़नवीस से असंतुष्ट भाजपा के कई नेता भी पर्दे के पीछे अपनी ही पार्टी की सरकार नहीं बनने देने में भूमिका निभा रहे हैं।

उद्धव ठाकरे और फड़नवीस के बीच शनिवार को एक बार फिर सरकार बनाने को लेकर बातचीत हुई थी।

शिवसेना की अपना मुख्यमंत्री आधे कार्यकाल के लिए बनाने की शर्त भाजपा ने मंजूर नहीं की और बात टूट गई।

अब दोनों पार्टियों के तालमेल से सरकार बनने की संभावना नहीं बची है।

इसके बाद शिवसेना और राकांपा के तालमेल से सरकार बनने की संभावना और मजबूत हो गई है।

अब कांग्रेस की की तरफ सबकी निगाहें हैं। कांग्रेस के कई विधायकों को राजस्थान के जयपुर में ठहराया गया है।

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कांग्रेस की तरफ से सिर्फ संजय निरुपम का बयान आया है

कि महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा की सरकार बनने की संभावना सिर्फ कल्पना है।

यदि हम इस कल्पना को हकीकत में बदल भी देते हैं तो यह शिवसेना के समर्थन के बगैर संभव नहीं है।

यदि हम शिवसेना का समर्थन लेते हैं तो यह कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकता है।

इस बयान में यह स्पष्ट नहीं है कि कांग्रेस का क्या रुख है। यह निरुपम का निजी विचार प्रतीत होता है।

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने रविवार सुबह फिर दोहराया कि हमारे नेता व्यापारी नहीं है।

राजनीति उनकी पार्टी के लिए कारोबार नहीं है।

उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि अजेय होने का बुलबुला अब फूट गया है।

सरकार बनाने के लिए नेता को खरीदने का घमंड अब राज्य में काम नहीं करता।

उन्होंने कहा कि अगर कोई सरकार गठित नहीं करता है तो शिवसेना दखल देगी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर भाजपा को बहुमत का भरोसा था तो उसने (परिणाम घोषित होने के) चौबीस घंटे बाद ही दावा क्यों नहीं किया?

मुझे नहीं लगता कि भाजपा के पास सरकार बनाने का दावा करने के लिए पर्याप्त संख्याबल है।

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शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में भाजपा पर प्रहार का सिलसिला जारी है।

ताजा संपादकीय में लिखा गया है, ‘बदले की, टांग खींचने और गुलामी की राजनीति सभी को खत्म करनी है।

औरों को डर दिखाकर शासन करने वाली टोली आज खुद खौफजदा है।

साथ ही यह भी लिखा है, यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि हिटलर मर गया है और गुलामी की छाया हट गई है।

इस बीच शिवसेना के विधायकों को बांद्रा के रंगशारदा होटल से हटाकर मालाड स्थित एक रिसोर्ट में भेज दिया गया है,

जहां शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार सुबह उनसे मुलाकात की।

उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित निवास मातोश्री के पास शिवसेना के समर्थन में पोस्टर लगा दिए गए हैं, जिनमें उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई है।

इन पोस्टरों के बारे में संजय राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे शिवसेना के नेता हैं और वही समय पर उचित फैसला करेंगे।

उन्होंने पहले ही कह दिया है कि वह शिवसेना के किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाएंगे।

इस घटनाक्रम के बीच मुंबई में यह जोरदार चर्चा है कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री का पद संभाल सकते हैं।

हालांकि शिवसेना की तरफ से इसकी घोषणा नहीं की गई है। यह तय है कि नई सरकार के गठन में शिवसेना की ही प्रमुख भूमिका रहेगी।

संजय निरुपम के बयानों पर कांग्रेस के रणनीतिकार गौर करेंगे, ऐसा नहीं लगता।

गणित यह बन रहा है कि शिवसेना और राकांपा मिलकर सरकार बना सकती हैं और कांग्रेस बाहर से समर्थन दे सकती है।

गेंद अब पूरी तरह से शिवसेना के पाले में है और शरद पवार शिवसेना के साथ दिखाई दे रहे हैं।

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