विष्णु को शिव के बाद उमा का भी आशीर्वाद... - Naya India
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विष्णु को शिव के बाद उमा का भी आशीर्वाद…

भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और नई पीढ़ी के युवा ऊर्जावान विष्णु दत्त को पार्टी में कमान सौंपे पर जाने के बाद वरिष्ठ नेताओं का समर्थन आशीर्वाद देने का सिलसिला जारी है। अनुभवी और पुरानी पीढ़ी के नेता अब सदमे से बाहर निकल नई टीम वक्त की आवश्यकता का संकेत दे रहे।

इसी क्रम में मंगलवार को भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती ने प्रदेश के नवागत अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा से भाजपा कार्यालय पहुंचकर एकांत में चर्चा की। तो मीडिया की मौजूदगी में उनका अभिनंदन कर उन्हें आशीर्वाद भी दिया, इशारों इशारों में कुछ संकेत भी दे दिए ।

चाहे फिर संगठन के सक्षम और सही नेतृत्व को लेकर हो या फिर उम्र से बड़े भाजपा नेताओं का जिक्र कर बता दिया कि उनके पास भी उम्र है और अपने से कम उम्र के विष्णु को आशीर्वाद के साथ ताकत देकर इस लड़ाई के लिए वह भी तैयार हैं । 24 घंटे पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पर एकांत में विष्णु दत्त मुलाकात कर चुके हैं। तो मीडिया से मुखातिब हो शिवराज ने कमलनाथ सरकार पर जीवंत और ज्वलंत मुद्दों पर सवाल खड़े कर हमला बोला था। कुछ इसी लाइन को उमा ने भी अपने अंदाज में आगे बढ़ाया।  उन्होंने विष्णु दत्त की अगुवाई में कमलनाथ सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई। विष्णु दत्त को दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और राष्ट्रीय उपाध्यक्षों का आशीर्वाद हासिल हो चुका है।

दोनों का भरोसा नए अध्यक्ष को मिला। इससे पहले अध्यक्ष की ताजपोशी के दौरान प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व चुनौतियों से निपटने के लिए पीछे खड़ा हो चुका। 48 घंटे के दौरान भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अध्यक्ष की मौजूदगी में कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार को जिस तरह आईना दिखाया। वो गौर करने लायक है। संदेश साफ है, भाजपा वादाखिलाफी, किसानों के साथ छलावा और नागरिकों को उनके हकों से वंचित करने को बड़ा मुद्दा बनाने का मन बना चुकी है। उमा भारती ने जिस तरह विष्णु दत्त को कुशल संगठक बताकर आंदोलन और संघर्ष में उनकी भूमिका को सामने रखा और उनके नेतृत्व को सर्वोपरि बताया। उसमें एक साथ कई लोगों के लिए संदेश छुपा है। माना जा सकता है कि संगठन सर्वोपरि और अध्यक्ष में सब समाहित यानी अब पुरानी और नई पीढ़ी के सभी नेताओं को विष्णु दत्त के नेतृत्व को स्वीकार कर आगे बढ़ना होगा।

उमा ने विष्णु दत्त की नई जिम्मेदारी को उनकी ताकत को चुनौतियों से भी आगाह कर दिया। अध्यक्ष के अभिनंदन की आड़ में साध्वी ने यह भी साफ कर दिया कि बदलाव से पहले जो भी नेता प्रदेश में भाजपा के नीति-निर्धारक बनकर अपनी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.. उमा उन सबसे छोटी हैं, इसलिए यह नहीं समझा जाए कि वह अगर चुप है तो घर बैठ चुकी है। अभी तक वो आशीर्वाद देने वालों में शामिल नहीं हो पाईं, लेकिन विष्णुदत्त उम्र में उनसे छोटे हैं तो उन्हें जरूर आशीर्वाद देंगी। इशारों-इशारों में उमा ने स्वर्गीय ठाकरे और राजमाता के त्याग और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की ताकत की याद दिलाकर विष्णु दत्त को पार्टी का सही नेतृत्वकर्ता बता बिना ज्यादा कुछ कहे बहुत कुछ कह दिया। राजधानी भोपाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था का जिक्र कर साध्वी ने संघर्ष के लिए खुद को सड़क पर उतरने के भी संकेत यह कहकर दे दिए कि पिछले दिनों चाकूबाजी की एक घटना ने उन्हें विचलित कर दिया था। यदि पैर में प्लास्टर नहीं होता तो वो मौके पर पहुंच गई होतीं। उमा ने विष्णु दत्त से कार्यालय के कक्ष में वन टू वन चर्चा भी की। लंबे अरसे बाद उन्होंने 1 घंटे से ज्यादा समय भाजपा पार्टी कार्यालय में बिताया।

मीडिया के सामने दूसरे मुद्दों पर कुछ ना बोलते हुए खुद को विष्णु के अभिनंदन और आशीर्वाद तक सीमित रख सवालों के जवाब दिए। केसर-चंदन, शौर्य, कार्यकर्ता, संगठन, चुनौती, अभिनंदन, आशीर्वाद से इर्द-गिर्द जो भी बात उन्होंने कही उसके निहितार्थ निकाले जाना लाजमी है तो कुछ सवाल भी जरूर खड़े होंगे। विष्णु दत्त ने अध्यक्ष का कार्यभार संभालते वक्त उमा का जिक्र कर पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह उनके संपर्क में है । विष्णुदत्त यदि शिवराज के घर उनका आशीर्वाद लेने पहुंच सकते तो फिर वह उमा भारती के भी घर जा सकते थे। लेकिन साध्वी ने बीजेपी कार्यालय पहुंचकर खुद कदम आगे बढ़ाए और सियासी संकेत भी दे दिए। कि वक्त का उन्हें भी इंतजार है। उमा उत्तर प्रदेश और दिल्ली छोड़कर पिछले कई दिनों से भोपाल में डेरा डाले हैं। समय-समय पर भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं के साथ खुद को खड़ा दिखाती रहीं। उमा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय का रुख उस वक्त किया। जब पार्टी का नेतृत्व राकेश सिंह के हाथ से निकलकर विष्णु दत्त शर्मा के हाथ में जा पहुंचा और भाजपा 1 साल से ज्यादा विपक्ष में समय गुजार चुकी है।

भाजपा में नेतृत्व के संकट को लेकर सवाल खड़े होते रहे । तो पार्टी संविधान के तहत अध्यक्ष का निर्वाचन संभव नहीं हुआ और विष्णु दत्त को मनोनीत किया गया। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जब साध्वी उमाश्री प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचीं। उसके थोड़ी देर पहले राज्यसभा चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया। मध्यप्रदेश में विधानसभा के अंकगणित को देखते हुए कांग्रेस के खाते में दो और भाजपा के खाते में 1 सीट आ रही है, जबकि तीसरी सीट को लेकर भाजपा अपनी रणनीति बदल सकती है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती की भाजपा कार्यालय में दस्तक और विष्णुदत्त से अपने आत्मीय और भरोसे के संबंधों को सामने रखना। मायने रखता है। खासतौर से जब वो कहती हैं कि विष्णु देव को आशीर्वाद देने की स्थिति में वो हैं। जब विष्णु दत्त ने खजुराहो लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था तब उमाश्री उनके समर्थन में प्रचार करने पहुंची थीं। परिसीमन के बाद यह सीट कुछ बदल गई, लेकिन उमा खजुराहो से लोकसभा के चुनाव जीत चुकीं, जो उनके अपने गृह क्षेत्र बुंदेलखंड का हिस्सा है। दिल्ली चुनाव और उससे पहले हरियाणा में चुनाव के बाद उमा के ट्वीट चर्चा में रहे।

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