दलित-आदिवासी वर्ग से कौन भेजेगा राज्यसभा

मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए 3 सीटों पर चुनाव होना है। 2 सीटों पर कांग्रेस का और एक सीट पर भाजपा का मजबूत दावा है। दोनों दलों की ओर से दिग्गज नेता राज्यसभा में जाने के लिए कतार में हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान बाहर से भी प्रत्याशी मैदान में उतार सकती है। जिस तरह की जोड़-तोड़ और उठापटक पिछले कुछ दिनों से राज्यसभा चुनाव के लिए चल रही है उससे अब इतना तय है कि कोई कितना ही बड़ा लेता क्यों ना हो, लेकिन राज्यसभा में जाना अब किसी के लिए भी आसान नहीं है।

दरअसल जो भी बड़ा नेता जब विधानसभा लोकसभा का चुनाव हार जाता है उसकी पूरी कोशिश राज्यसभा में जाने की होती है। अधिकांश नेता राज्यसभा से ही सांसद रहकर परसों तक केंद्र की राजनीति और सरकार में मंत्री रहे हैं। वैसे तो राज्यसभा में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली प्रतिभाओं को भेजा जाता था लेकिन धीरे-धीरे उद्योगपति, फिल्मी कलाकार, खिलाड़ियों को लोकप्रियता के आधार पर मौका दिया जाने लगा, लेकिन जहां-जहां दिग्गज नेता दावेदार होते हैं वहां फिर किसी और को मौका नहीं मिल पाता।

बहरहाल 26 मार्च को देश की जिन 55 सीटों पर राज्यसभा के लिए चुनाव होना है उसमें तीन सीटें मध्यप्रदेश से हैं। इन 3 सीटों के लिए भाजपा और कांग्रेस में लगभग एक दर्जन दावेदारों के बीच जोड़-तोड़ पिछले कुछ महीनों से चल रही है। जहां तक प्रदेश में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस की बात है तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह तो दावेदारी कर ही रहे हैं, राष्ट्रीय स्तर से प्रियंका गांधी का भी नाम लिया जा रहा है। वहीं अंदरखाने से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से भी राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग उठ रही है। यही कारण है कि पार्टी को दो नाम चयन करने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

इसी तरह भाजपा में भी एक सीट के लिए घमासान मचा हुआ है। वर्तमान राज्यसभा सदस्य प्रभात झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के साथ-साथ लगभग एक दर्जन दावेदार ऐसे हैं, जो दिल्ली का दौड़ लगा रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस के पास जहां 121 विधायक हैं वहीं भाजपा के पास 107 विधायक हैं। राज्यसभा सदस्य चुने जाने के लिए तीनों उम्मीदवारों को 58-58 विधायकों के वोट जरूरी हैं। इस लिहाज से कांग्रेस के दो और भाजपा के एक सदस्य के चुने जाने की संभावना है।

कुल मिलाकर राज्यसभा की 3 सीटों के लिए प्रदेश में दोनों ही दलों कांग्रेस और भाजपा के पास जिस तरह से दिग्गज नेताओं की दावेदारी है उससे दोनों ही दलों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। पार्टी नेता जहां लगातार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति वर्ग को महत्व देने बात करते रहे हैं लेकिन इन चुनावों में कौन सा दल इस वर्ग से राज्यसभा में भेजेगा इस पर भी राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें रहेंगी।

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