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युवक कांग्रेस चुनाव से निकल रहे चमकदार चेहरे

दरअसल युवक कांग्रेस में चुनाव के पहले तक मनोनयन करके प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाते थे और जिसमें भोपाल से लेकर दिल्ली तक जोड़-तोड़ हुआ करती थी और जिस नेता की पार्टी हाईकमान से पटरी बैठती थी वह अपने पट्ठे को इस पद पर नियुक्त करा लेता था और जितना संभव हो उतना अधिकतम कार्यकाल उपलब्ध कराता था लेकिन तब युवक कांग्रेस हंगामा और हुल्लड़ के लिए जानी जाती थी और प्रदेश अध्यक्ष पार्टी की गतिविधियों से ज्यादा अपने आका की भक्ति में लीन रहता था जिससे ना तो वह प्रदेशव्यापी युवाओं के बीच जनाधार बना पाता था और ना ही कार्यकर्ताओं से विनम्रता के साथ पेश आता था।

युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का रुतबा ऐसा होता था कि पार्टी के ही मंत्री-पदाधिकारी कई बार भय खाते हुए दिखाई देते थे। अधिकारी और कर्मचारियों में भी उनका जलवा इसलिए बनता था कि कहीं यह कोई अप्रिय घटना न कर दे। पार्टी को मजबूती देने और युवाओं को जोड़ने में वैसी सफलता नहीं मिलती थी जैसी अपेक्षा की जाती थी। कई बार युवक कांग्रेस के कारण पार्टी को बदनामी भी झेलनी पड़ती थी। शायद यही सब कारण थे जिसके चलते राहुल गांधी ने पूरे देश में युवक कांग्रेस का संगठन चुनाव के माध्यम से खड़ा करने का अभियान चलाया जिसमें शुरुआती दौर में ऐसा माहौल बना कि चुनाव से जो पदाधिकारी चुने जा रहे हैं, वे अपेक्षाकृत अपनी चमक-धमक नहीं दिखा पा रहे।

यहां तक आशंका व्यक्त की गई कि यदि ऐसे ही चुनाव से युवक कांग्रेस में पदाधिकारियों का चुना जाना चलता रहा तो फिर युवक कांग्रेस का महत्व कम हो जाएगा लेकिन 2011 के बाद से चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में दो प्रदेश अध्यक्ष बने पहले प्रियव्रत सिंह जो वर्तमान में मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और जिनकी सौम्यता, मिलनसारिता और काम करने की शैली अन्य मंत्रियों से अलग दिखाई दे रही है और 2013 में चुनाव से ही कुणाल चौधरी प्रदेश अध्यक्ष बने जो आज पार्टी के विधायक हैं।

कुणाल चौधरी भाजपा शासन के खिलाफ पूरे प्रदेश में जमीनी संघर्ष किया और हजारों युवाओं को पार्टी से जोड़ा। पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व की मानता है कि मध्यप्रदेश में 15 साल की भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने में मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस का महत्वपूर्ण रोल रहा है। यही नहीं प्रियव्रत की कार्यकारिणी में पदाधिकारी रहे सुरेंद्र सिंह हनी बघेल, ओमकार सिंह मरकाम आज ना केवल मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री हैं वरन आदिवासियों के महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में उभरे हैं। उस दौरान के पदाधिकारी शैलेंद्र पटेल और सरस्वती भी विधायक बन चुके थे। 2013 में कुणाल चौधरी की कार्यकारिणी में काम करने वाले सचिन भूपेंद्र मरावी, मुकेश पटेल, महेश परमार, मनोज चावला जहां विधायक हैं वहीं हिना कावरे विधायक के साथ-साथ मध्य प्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष भी हैं।

कुणाल चौधरी की कार्यकुशलता के कारण ही उन्हें लगभग 6 वर्ष का लंबा कार्यकाल प्रदेश अध्यक्ष के रूप में करने को मिला। अब वो विधायक हैं। उन्हें अपनी विधानसभा में भी समय देना है। इस कारण इस बार उनकी जगह नया प्रदेश अध्यक्ष चुना जाएगा। कुल मिलाकर युवक कांग्रेस में जब से चुनाव प्रक्रिया द्वारा प्रदेश अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और भी पदाधिकारी चुनने का सिलसिला शुरू हुआ है तब से युवक कांग्रेस में चमकदार चेहरे सामने आ रहे हैं जो पार्टी नेताओं के चहेते भी हैं।

बहरहाल पार्टी ने 6 साल बाद युवक कांग्रेस का चुनावी कार्यक्रम घोषित कर दिया है जिसमें 14 और 15 मार्च को जिला अध्यक्ष, महासचिव का चुनाव होगा एवं 19 मार्च तक नया प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। इस बार चुनाव में बहुत कुछ परिवर्तन भी किए गए हैं। मसलन इस बार चुनाव मोबाइल ऐप से वोट डालने से होगा और इसमें 2 साल पहले तक जो सदस्य बने हैं वही वोट डाल सकेंगे। इसमें कुछ लोगों को आपत्ति भी है। जो सदस्य 2 साल पहले 34 वर्ष का था अब वह ओवरेज हो गया है। ऐसे में वह कैसे वोट डाल सकेगा और जो डेढ़ साल पहले युवक कांग्रेस के सदस्य बने और प्रदेश में सत्ता वापसी के लिए प्रयास किए यदि उन्हें वोट डालने नहीं मिला तो उनमें निराशा बढ़ेगी।

जाहिर है युवक कांग्रेस में चुनाव के बाद जो पदाधिकारी बने हैं उन्होंने युवक कांग्रेस की छवि तो बदली है लेकिन मनोनयन के समय युवक कांग्रेस की जो धमक और चमक थी वह गायब है। पार्टी अब चुनाव से चुने जाने वाले पदाधिकारियों में ही पार्टी का उज्जवल भविष्य देख रही है। इस कारण युवक कांग्रेस के चुनाव का पार्टी में खासा महत्व है। प्रदेश के युवा चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।

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