पॉवर सेंटर बने ‘पवार’ भरोसे सोनिया और शिवसेना…

शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी किसी अंतिम फार्मूले पर नहीं पहुंच पाई तब भाजपा ने वेट एंड वॉच की बात क्या कर महाराष्ट्र की सियासत में ट्विस्ट लाने की कोशिश की है।

ऐसे में मंगलवार को बैठकों का यह दौर जब आगे बढ़ेगा तब देखना होगा सत्ता का स्वरूप और उसमें भागीदारी और उसके संचालन के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लेकर भाजपा विरोधी यह तिकड़ी किस निष्कर्ष पर पहुंचती है। क्योंकि बड़ी चुनौती पुराने गठबंधन के टूट जाने के साथ नए गठबंधन बनाने को लेकर बनी हुई है।

सत्ता के खेल में महाराष्ट्र से भाजपा के बाहर होने के बाद राज भवन ने जिस तरह दूसरे दलों को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। उससे फिलहाल यही संकेत गया कि सबसे बड़े दल को व्यक्तिगत तौर पर राजभवन बुलाने का जो सिलसिला भाजपा के साथ शुरू हुआ था। वह शिवसेना से आगे बढ़ते हुए अब एनसीपी तक पहुंच चुका है। इसी निर्धारित समय सीमा में सरकार बनाने के लिए भाजपा विरोधियों को आंकड़े जुटाना है।

इसे भी पढ़ें :- कितना आसान है राहुल का अपमान!

राज्यपाल से मुलाकात के बाद एनसीपी का यह बयान गौर करने लायक है जिसमें उन्होंने गठबंधन सहयोगी कांग्रेस से चर्चा करने के बाद वह अपने फैसले से राज्यपाल को अवगत कराएंगे। राज्यपाल ने शिवसेना की तरह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को भी लगभग 24 घंटे मंगलवार रात 8:30 बजे तक का समय दिया है।

यानी इस क्रम में कांग्रेस को भी बुलाया जा सकता है । यह वह समय होगा जब शिवसेना कांग्रेस और एनसीपी नए गठबंधन का खाका भी राजभवन के सामने रख सकते हैं। तब देखना दिलचस्प होगा राज्यपाल राष्ट्रपति शासन से पहले बचे सीमित विकल्प पर वह किसे मंजूरी देते हैं। फिलहाल एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता मिल चुका है।

चुनाव से पहले भाजपा शिवसेना गठबंधन टूट चुका तो कांग्रेस और एनसीपी का चुनाव पहले का गठबंधन मजबूत होने के बावजूद किसी अंतिम फैसले पर नहीं पहुंच पाया है। समझा जा सकता है कि सैद्धांतिक और वैचारिक धरातल पर मतभेद के बावजूद एनसीपी कांग्रेस शिवसेना के नए गठबंधन को नया आकार देने के लिए जरूरी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की एक्सरसाइज या तो पूरी नहीं हो पाई या फिर इन दलों के अपने घोषणापत्र के वादे सरकार की स्थिरता में आड़े आ रहे हैं।

इसे भी पढ़ें :- रघुवर ने सारे सीएम दावेदारों को अटकाया

कांग्रेस के मुकाबले एनसीपी शिवसेना के नेतृत्व में नई सरकार बनाने को लेकर ज्यादा गंभीर लेकिन उसने भी पत्ते नहीं खोले हैं, वजह साफ़ चुनाव जिस कांग्रेस के साथ लड़ा उसके बिना समर्थन के सरकार अस्तित्व में नहीं आ सकती।

इन तीनों दलों का बड़ा मकसद यदि महाराष्ट्र की सत्ता से भाजपा को बाहर रखना। तो वह नई सरकार की स्थिरता को लेकर अपने विवादों को कम से कम कर लेना चाहती। शिवसेना और एनसीपी की राजनीति महाराष्ट्र पर ही केंद्रित लेकिन कांग्रेस को देश के दूसरे राज्यों की परिस्थितियों का भी आकलन करना जरूरी हो गया है।

एनसीपी पहले से ही यूपीए गठबंधन का सहयोगी लेकिन एनडीए के सहयोगी और भाजपा की तरह हिंदुत्व की सियासत करने वाली शिवसेना से लेकर मतभेद उसके किसी से छुपा नहीं है।  महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए शिवसेना को राज्यपाल ने जो समय सीमा सोमवार शाम 7:30 बजे तक की तय की थी।  उस समय तक कांग्रेस एनसीपी के समर्थन की चिट्ठी वह हासिल नहीं कर पाई।

राज्यपाल ने भी बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया कि शिवसेना ने 3 दिन का समय और मांगा था वह नहीं दिया गया है। तो आदित्य ठाकरे ने सरकार बनाने के अपने दावे को खारिज नहीं होने दिया,

इस बीच राज्यपाल ने एनसीपी नेता अजित पवार को राजभवन बुलाकर सत्ता के बदलते समीकरण में एक नया ट्विस्ट ला दिया। इसके साथ ही दिल्ली से लेकर मुंबई और जयपुर तक दिन भर बंद कमरों में बैठकर चिंतन मंथन के साथ मीडिया में बयान देने के दौर चलते रहे।

इसे भी पढ़ें :- भाजपा का अपने एजेंडे पर लौटना

चाहे फिर वह मोदी सरकार से नाता तोड़ एनडीए से बाहर होने के लिए शिवसेना के मंत्री का इस्तीफा हो, या फिर उसके बाद उद्धव ठाकरे की शरद पवार से बंद कमरे में चर्चा। यही नहीं जयपुर में मौजूद कांग्रेस विधायकों से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की डिनर डिप्लोमेसी। यही नही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की मुलाकात या फिर दिल्ली में दो दौर की सोनिया गांधी की अगुवाई में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्यों से चर्चा ।

यही नहीं सोनिया की जयपुर में मौजूद विधायकों से फोन पर संवाद के बाद जो खबर निकल कर आई। उससे यह साफ हो गया कि कॉन्ग्रेस अंतिम फैसले से पहले वक्त चाहती है।  जिससे वह एक और अपने विधायकों को एकजुट रख सके तो गठबंधन की सहयोगी एनसीपी की अपेक्षाओं को भी पूरा कर सके। जो लगातार शिवसेना उद्धव ठाकरे के संपर्क में।

कांग्रेस ने तय किया कि एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें वरिष्ठ नेता मंगलवार को मुंबई पहुंच कर एनसीपी नेता शरद पवार और प्रदेश के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इससे पहले एनसीपी विधायक दल के नेता बने अजित पवार ने भी विधायकों से चर्चा के बाद मीडिया को स्पष्ट कर दिया कि फोन करके राज्यपाल ने उन्हें भी बुलाया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares