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इधर ट्रस्ट पर रार, उधर जमीन पर तकरार..?

ओमप्रकाश मेहता

देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा करीब दस दिन पहले अयोध्या राम मंदिर भूमि की मिल्कियत पर फैसला सुनाया, फैसला सुनने के बाद दोनों पक्षों ने उसे स्वीकार भी कर लिया था। किंतु अब फैसले को लेकर दोनों पक्षों में हलचल मची हुई है, विजेता हिन्दु पक्ष जहां फैसले में वर्णित ट्रस्ट के आदेश पर अपनी-अपनी ‘गोटी फिट’ करने में व्यस्त है

तो मुस्लिम पक्ष अब फैसले पर पुनर्विचार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में सौंपने की तैयारी कर रहा है, मुस्लिमों का अधिकृत संगठन ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जहां पुनः सर्वोच्च न्यायालय के द्वार खटखटाने जा रहा है, वहीं मुस्लिमों के एक ओर अहम् संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने तो फैसले को सिरे से ही नकारते हुए मुस्लिमों को मस्जिद निर्माण हेतु अयोध्या का अस्वीकार दिया है।

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अब जहां तक सुप्रीम कोर्ट का सवाल है, इस विवादित फैसले को सुनाने वाले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई साहब सेवानिवृत्त हो चुके है और सरकार से इस फैसले के प्रतिफल की प्रतीक्षा में है, जबकि इस फैसले के एक प्रमुख सहभागी न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.सी. बेवडे अब मुख्य न्यायाधीश बन चुके है, और पांच न्यायाधीशों की बंेच का यह फैसला सर्वसम्मत था और चूंकि नियमानुसार फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों के सामने ही इस फैसले की पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत होना है, इसलिए ऐसा लगता नहीं कि फैसले में कोई परिवर्तन या संशोधन होगा।

किंतु कुल मिलाकर फैसले के दस दिन बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि मुस्लिमों का कोई भी वर्ग या संगठन इस फैसले से सहमत नहीं है। इसलिए पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाने के बाद मुस्लिम संगठन कौन सा कदम उठाएगें। यह फिलहाल कहना या अनुमान लगाना मुश्किल ही है, इसीलिए इस नई परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार ने भी गंभीर चिंतन शुरू कर दिया है। यह तो हुई मुस्लिम पक्ष की बात, अब यदि हम इस फैसले पद अपनी खुशी की सीमा लांघने वाले हिन्दू पक्ष के नेताओं की बात करें तो उसने तो भव्य राम मंदिर के न सिर्फ रंगीन सपने देखना शुरू कर दिए है,

बल्कि मंदिर के निर्माण में अपने अमूल्य योगदान के भी प्रयास शुरू कर दिए है और मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट या न्यास में शामिल होने के लिए जी-तोड़ प्रयास शुरू कर दिए है। ट्रस्ट को लेकर हिन्दूओं के एक संगठन नेता वेदांती ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, अयोध्या आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भाजपा सांसद राम विलास वेदांती ने स्वयं को इस ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाने की मांग की है।

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यह मांग एक ऑडियों क्लिप के माध्यम से संत परमहंस दास से चर्चा के रूप में सामने आई है, ऑडियों क्लिप में नृत्य गोपालदास के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया गया है, महंत नृत्य गोपाल दास गौरक्षक पीठ के प्रमुख और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ट्रस्ट के प्रमुख के रूप में पहले ही नाम प्रस्तावित कर चुके है। इस प्रकार प्रस्तावित मंदिर ट्रस्ट को लेकर हिन्दू पक्ष कई खेमों में बंट चुका है और अपनी-अपनी दावेदारी उजागर कर चुका है।

जबकि केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ट्रस्ट की पूरी कमॉन अपने हाथों में रखना चाहती है, चूंकि इस ट्रस्ट का गठन सरकार को ही करना है, इसलिए यह स्पष्ट है कि सरकार के चहेते ही इस ट्रस्ट में शामिल होंगे और संभव है, योगी आदित्यनाथ को इस ट्रस्ट का प्रमुख मनोनीत कर दिया जाए, किंतु इसके बाद अयोध्या के संत नेताओं का रूख क्या होगा, इसकी कल्पना अभी से की जा सकती है?

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जबकि सत्तारूढ़ भाजपा व उसके अहम् नेता व पदाधिकारी अगले तीन साल में भव्य राम मंदिर के निर्माण की घोषणा कर चुके है और अयोध्या में मंदिर निर्माण स्थल पर उकेरी गई शिलाओं का पहुंचना भी शुरू हो गया है, मंदिर निर्माण हेतु दक्षिण भारत का प्रमुख तिरूपति बालाजी ट्रस्ट पहले ही एक हजार करोड़ रूपए देने की घोषणा कर चुका है और भी अनेक स्त्रोतों से आर्थिक सहायता की संभावना व्यक्त की जा रही है।

अब सबसे बड़ी उलझन यही है कि एक ओर फैसले के परिप्रेक्ष्य में हिन्दू संगठनों ने मंदिर निर्माण की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है, वहीं मुस्लिम संगठनों ने फैसले पर अपनी असहमति दर्ज करा दी है और इस असहमति को सुप्रीम कोर्ट की देहरी तक पहुंचाने की भी तैयारी कर ली है। अब ऐसे में राष्ट्रव्यापी चिंता इस बात को लेकर है कि क्या मंदिर का निर्माण निर्विघ्न हो पाएगा और मोदी जी के इसी कार्यकाल के दौरान रामलला जी वहां विराज पाएगें? यही अहम् सवाल फैसले पर छा रहे संकट के बादलों को लेकर उठाया जा रहा है।

अब इस स्थिति को लेकर कयास तो यही लगाए जा रहे है कि सुप्रीम कोर्ट का तो मुस्लिम संगठनों की पुनर्विचार याचिका को खारिज करना तय माना जा रहा है, किंतु उसके बाद असंतुष्ट मुस्लिम संगठनों व सरकार का अगला कदम क्या होगा, इन्हीं पर कयासों का बाजार गर्म है। सरकार इस माहौल को कैसे अपने अनुरूप बनाती है? यही देखने वाली बात होगी।

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