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कुछ क्लासिक और ‘ए पैसेज नार्थ’

A Passage North book

महामारी में घर बंद के वक्त में मैंने पुराने क्लासिक अल्बर्ट कामूस (The Plague) हरमन मैलेविले (Moby Dick) और सलमान रश्दी (Midnight Children व Rushdie ‘Languages of Truth: Essays 2003-2020’) को पढ़ा वहीं बुकर पुरस्कार 2021 के लिए नामांकित तमिल उपन्यासकार अनुक अरुदप्रगसम की ‘ए पैसेज नार्थ’ पठनीयता में गहरी छाप छोड़ने वाली थी। यह पुस्तक सराकोरों के कई पहलूओं को उद्घाटित करने वाली है।

जैसे “हम जिस वर्तमान को मानते हैं वह हमारे सामने है, हमेशा के लिए, जीवन की कुछ ऐसी चीजों में से एक है, जिससे हम अलग नहीं हो सकते”।

उपन्यास की शुरुआत एक टेलीफोन कॉल से होती है, एक संदेश जो रानी की मृत्यु की सूचना देता है। रानी, कृष्ण की दादी थीं जो पहले उसकी देखभाल करती थीं। वह एक अप्रत्याशित मौत थी, जो उसी समय आई जब कृष्ण को, अप्रत्याशित रूप से, अंजुम का एक ई-मेल प्राप्त होता है। वह एक ऐक्टिविस्ट था जो  चार साल पहले, दिल्ली में रहने के दौरान प्यार में पड़ गया था। इसके साथ कई पुरानी यादें और चाहतें भी चली आई थीं।

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युद्ध के बाद कृष्ण कोलंबो लौट गया था ताकि अपने देश के पुनर्निर्माण और पुनर्गठन में अपने हिस्से का  योगदान कर सके। एक गृहयुद्ध जो लगभग तीन दशकों तक चला। एक युद्ध जिसकी जड़ें दक्षिण में बहुसंख्यक सिंहली आबादी और उत्तर में अल्पसंख्यक तमिलों के बीच एक जातीय संघर्ष में थीं, युद्ध जिसका 2009 में एक खूनी अंत हुआ जब श्रीलंका के सरकारी बलों ने विद्रोहियों के कब्जे वाले उत्तर को हराया था।

‘पैसेज नॉर्थ’ युद्ध के बाद के विनाशकारी प्रभाव में स्वयं की भावनाओं की यात्रा की है। उसके बाद के प्रभाव जो कभी पीछा नहीं छोड़ते हैं, लेकिन भूमिगत बलों या प्रक्रियाओं की तरह बने रहते हैं, अभी भी गहरे अंदर चल रहे हैं, वर्तमान और भविष्य में अपनी दिशा में बढ़ रहे हैं।

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अंतिम संस्कार के लिए कृष्ण कोलंबो से युद्धग्रस्त उत्तरी प्रांत में ट्रेन से लंबी यात्रा करता हैं और इसके साथ ही शुरु होती है हिंसा से तबाह एक द्वीप की आत्मा में एक रास्ते की। सूक्ष्मता और शालीनता के साथ लिखा गया, ए पैसेज नॉर्थ लापता और मारे गए लोगों की एक मार्मिक याद है और समय, चेतना तथा दूसरों के साथ बने हमारे संपर्कों या संबंधों पर एक स्थायी छाप है। कृष्ण अपने अतीत और वर्तमान को समझने के लिए अन्य कहानियों तथा इतिहास पर विचार करते हैं। अरुदप्रगसम प्राउस्टियन डिग्रेशन को एक प्रभाव के रूप में उद्धृत करते हैं – एक गरीब शिव भक्त, पूसल की पौराणिक कहानी से, जो अपने भगवान के लिए बेहद भव्य मंदिर अपने दिमाग में बनाता है, बुद्ध के ज्ञान का विवरण, कालिदास के महाकाव्य मेघदूत का पुनर्पाठ करता है और फिर एक विभाजित द्वीप श्रीलंका का जो हर जगह मौजूद है। गंभीर रूप से प्रभावित करने वाले गद्य में, अरुदप्रगसम ने स्वतंत्रता की उस चाहत की पड़ताल की है जिसकी वजह से दशकों तक चले गृहयुद्ध, हिंसा और हिंसा को भड़का दिया, भावनात्मक घाव दिए जो ठीक होने से इनकार करते हैं।

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कहानी मुख्यरूप से बिना किसी संवाद के और जीवन व मृत्यु के विभिन्न पहलुओं पर कृष्ण के काव्य और दार्शनिक चिंतन के एक एकालाप के रूप में सामने आती है जो इच्छा, दुख, हानि, तड़प, अनुपस्थिति, एकांत, उम्र बढ़ने, रिश्ते, आघात, पीड़ा, स्वास्थ्य लाभ आदि पर केंद्रित है। बारीकियों और विस्तार पर पूरी सावधानी के साथ लिखा गया, ए पैसेज नॉर्थ न केवल नायक के दिमाग की समृद्धि बताता है बल्कि समकालीन श्रीलंका को भी युद्ध से पीड़ित, आघातित करता है। चिंतनशील और उदास, पृष्ठों पर कृष्ण की यात्रा शुरू से ही आपकी होने लगती है। गद्य में विषयांतर, दार्शनिकता, गीत जैसा सौंदर्य, सब मिलाकर अरुदप्रगसम ने एक साधारण कहानी को जीवन की एक आवश्यकता में बुना है जहां अतीत मृत हो सकता है लेकिन अतीत स्वयं मरा नहीं है।

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