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एनपीआर और एनआरसी का झमेला!

शंशाक राय– सोशल मीडिया में मजाक में कहा जा रहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आम लोगों को अनेक चीजों का विशेषज्ञ बना देगी। पहले अनुच्छेद 370 और 35ए के बारे में लोगों की जानकारी बढ़ी। फिर अयोध्या मामले को लोगों ने समझा और अब नागरिकता कानून को समझ रहे हैं। असल में सरकार जो भी मुद्दे उठा रही है उस पर ऐसी बहस छिड़ रही है कि लोगों का उसके बारे में थोक के भाव में कच्चा पक्का ज्ञान मिलने लग रहा है। सभी पक्ष अपने हिसाब से संविधान और कानून की व्याख्या कर रहे हैं और अपने अपने हिसाब से ही सरकार के प्रस्ताव को भी समझ रहे हैं।

नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी भी इसक अपवाद नहीं है। वैसे अब एनआरसी को एनआरआईसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटिजंस कहा जा रहा है। सो, कुछ दिन तक लोगों को एनआरसी और एनआरआईसी भी समझने में लगेगा। इन तमाम चीजों को लेकर कितना कंफ्यूजन हुआ इसे इस बात से समझा जा सकता है कि नागरिकता कानून के विरोध और समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों में पत्रकार लोगों से और लोग पत्रकारों से पूछ रहे हैं कि क्या उनको इस बारे में सब कुछ पता है?

बहरहाल, ताजा मामला एनपीआर और एनआरआईसी का है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा है कि दोनों अलग अलग हैं और इनका आपस में कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार एनपीआर का इस्तेमाल एनआरआईसी के लिए नहीं करेगी और जब नागरिक रजिस्टर बनाएगी तो डंके की चोट पर बनाएगी, चोरी-छिपे नहीं। उनकी इस सफाई के बाद कायदे से यह मामला थम जाना चाहिए था पर उलटे इससे विवाद और बढ़ गया है। विवाद इसलिए बढ़ गया है कि क्योंकि सरकार खुद कह चुकी है कि एनआरसी का पहला कदम एनपीआर है। यानी पहले एनपीआर होगा और उसके बाद एनआरसी बनेगी।

इन दोनों में आम नागरिक से एक जैसा डाटा लिया जाएगा। फर्क बस इतना है कि जनसंख्या रजिस्टर बनाते समय कोई सबूत या दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। इसका नियम बहुत आसान है। अगर कोई भी व्यक्ति किसी इलाके में छह महीने से रह रहा है या छह महीने तक रहने का इच्छुक है तो वह जनसंख्या रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा सकता है। उसे जानकारी सारी देनी होगी- नाम, पता, पिता का नाम, माता का नाम, पत्नी या पति का नाम, जन्म तिथि, जन्मस्थान, राष्ट्रीयता, शैक्षणिक योग्यता, मोबाइल नंबर आदि सब देना होगा। पैन, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस है तो उसका भी ब्योरा देना होगा। आधार नंबर भी बताना है पर वह वैकल्पिक है। सारी जानकारी देनी होगी पर दस्तावेज नहीं देने होंगे। दूसरी ओर नागरिक रजिस्टर में सारी जानकारी के साथ साथ अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज भी देने होंगे। जाहिर है अगर सरकार कभी भी एनआरसी बनाना शुरू करेगी तो एनपीआर का डाटा उसके बहुत काम आएगा। तभी गृह मंत्री का यह कहना समझ में नहीं आता है कि एनपीआर के आंकड़े का इस्तेमाल एनआरसी में नहीं किया जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने दो टूक अंदाज में कहा है कि एनपीआर और एनआरसी अलग अलग हैं और इनका आपस में कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद इस पर विवाद थम नहीं रहा है। इसका कारण यह है कि सरकार ने खुद कहा है कि एनआरसी बनाने की दिशा में पहला कदम एनपीआर है। सरकार की वेबसाइट पर यह बहुत साफ शब्दों में लिखा हुआ है कि एनआरआईसी भारत के नागरिकों का एक रजिस्टर होगा, जिसे बिल्कुल स्थानीय जैसे गांव, शहर, जिला, तहसील, राज्य और देश के स्तर पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए एनपीआर के डाटा का सत्यापन किया जाएगा और इस लिहाज से एनपीआर प्रस्तावित एनआरआईसी से ही जुड़ा हुआ है। एनपीआर को एनआरआईसी का शुरुआती या कच्चा डाटा कह सकते हैं।

इसके अलावा अमित शाह खुद संसद में कह चुके हैं कि सरकार पूरे देश में एनआरसी लागू करेगी। उन्होंने हाल के दिनों में अपनी हर चुनावी सभा में कहा है कि सरकार एनआरसी लागू करेगी और पांच साल में सभी घुसपैठियों को निकाल बाहर करेगी। अब सरकार कह रही है कि अभी तक उसने एनआरसी पर चर्चा नहीं की है और इसी बीच एनपीआर के प्रस्ताव और बजट को मंजूरी दे दी गई है। इसलिए किसी को भी सरकार की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है।

एक तरफ राजनीतिक रूप से एनआरसी को उठाया गया है और दूसरी और सरकार की वेबसाइट पर भी एनपीआर और एनआरआईसी के जुड़े होने की बात कही गई है। सरकार के नियमों के मुताबिक यह भी स्पष्ट है कि नागरिक रजिस्टर में नाम सुनिश्चित करने के लिए जनसंख्या रजिस्टर में नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। यानी अगर कोई भी व्यक्ति असम के 19 लाख लोगों की तरह एनआरसी से बाहर होना नहीं चाहता है तो पहले उसे एनपीआर में अपना नाम दर्ज कराना होगा। तभी केंद्रीय गृह मंत्री के भरोसा दिलाने के बावजूद विपक्षी पार्टियां और नागरिकता कानून से प्रभावित होने वाला पक्ष इस बात को नहीं मान रहा है कि एनपीआर और एनआरसी में कोई संबंध नहीं है। ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं और एक के आंकड़े का इस्तेमाल दूसरे के लिए किया जा सकता है।

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