Ramdhari singh dinkar jayanti दिनकर मानवता के गौरव–गायक
लेख स्तम्भ | आज का लेख| नया इंडिया| Ramdhari singh dinkar jayanti दिनकर मानवता के गौरव–गायक

दिनकर : मानवता के गौरव–गायक

मूलतः दिनकर मानवता के कवि हैं। मानवता से तात्पर्य है कि मानव संपूर्ण प्राणियों मे विवेकशील, बौद्धिक चेतना संपन्न और श्रेष्ठ्ता के शीर्ष पर है। अतः उसका उसका नैतिक धर्म है कि वह धरती के अन्य सभी प्राणियों के प्रति त्याग, दया, ममता, सहिष्णुता, क्षमा एवं उदारता आदि उदात्त गुणों का परिचय दे। Ramdhari singh dinkar jayanti

दिनकर भारतीय संस्कृति के गौरव-गायक हैं। दिनकर ने अपने समय के चुनौतियों से मुठभेड़ करते हुए मानवता का पथ आलोकित किया है। वे अतीत के गायक ही नहीं, बल्कि वर्तमान के दृष्टा कवि हैं। उन्होंने मानवता के गीत गाए हैं, जो उन्हें कालजयी रचनाकार के रूप मे प्रासंगिक एवं जीवंत बनाता है। मूलतः दिनकर मानवता के कवि हैं। मानवता से तात्पर्य है कि मानव संपूर्ण प्राणियों मे विवेकशील, बौद्धिक चेतना संपन्न और श्रेष्ठ्ता के शीर्ष पर है। अतः उसका उसका नैतिक धर्म है कि वह धरती के अन्य सभी प्राणियों के प्रति त्याग, दया, ममता, सहिष्णुता, क्षमा एवं उदारता आदि उदात्त गुणों का परिचय दे। दिनकर लिखते हैं-

जब तक है अवशिष्ट पुण्य बल कि नर मे अभिलाषा
तब तक है अक्षुण्ण मनुज मे मानवता कि आशा।
दिनकर मानव को सब प्राणियों मे सर्वश्रेठ घोषित करते हुए कहते हैं-
यह मनुज, जो ज्ञान आगार, यह मनुज जो सृष्टि का शृंगार!

मानवता का उल्लेख करते हुए दिनकर कहते हैं- मनुष्य जब पशुओँ से अलग होने लगा, यह वेदना तभी से उसके साथ हो गई। मानवता ही मनुष्य की वेदना का उत्तम नाम है। दिनकर समतामूलक विचारों के आग्रही कवि हैं। मानव-मानव मे असमानता की विषमता उन्हें व्यथित करती है।  कुरुक्षेत्र  मे वे अपनी इसी वैचारिक प्रतिबद्धता को  भीष्म पितामह के द्वारा अभिव्यक्ति देते हैं।

धर्मराज! यह भूमि किसी की नहीं है क्रीत दासी,
है जन्मना समान परस्पर इसके सभी निवासी।

यह मूलतः ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का ही भवानुवाद संदेश है। दिनकर ने कुरुक्षेत्र मे अनेक स्थलों पर इसी विश्व-बंधुत्व और समरसता की पवित्र भावना का चित्रण किया है।

श्रेय मानव की असीमित मानवों से प्रीत,
एक नर से दूसरे के बीच का व्यवधान,
तोड़ दे जो, है वही ज्ञानी, वही विद्वान और मानव भी वही।

दिनकर पूर्ण रूप से आस्तिकतावादी कवि हैं। उनके काव्य मे ईश्वर, धर्म, और उससे जुड़ी विभिन्न मान्यताओं के प्रति पूर्ण आस्था के विराट दर्शन होते हैं।

और बार-बार यह प्रार्थना करता हूं,
कि हे प्रभु! कठिन घड़ी में काम आओ।
लोग मुझे जैसा समझते हैं; तुम वैसा ही बनाओ।
साफ-सुथरा, पारदर्शी और ईमानदार, ईश्वर से डरने वाला
परंपरा का आदर करने वाला।

दिनकर कि काव्यकृतियों मे देश कि सांस्कृतिक चेतना की व्यंजना हुई है। उन्होंने पौराणिक आख्यानों और मिथकीय चरित्रों के माध्यम से अपनी जातीय विशेषताओं को उद्घाटित किया है। इस तथ्य की सापेक्षता मे कुरुक्षेत्र और रश्मिरथी दोनों बेहद महत्वपूर्ण प्रबंध काव्य हैं। दिनकर के काव्य मे धर्म, विज्ञान और संस्कृति का सुंदरर समन्वय है।

संस्कृति से सम्पृक्त यहां विज्ञान, मुक्त-कब होगा;
हुआ नहीं जो भारत मे संभव होगा।
एक हाथ मे कमल, एक मे धर्म दीप्ति विज्ञान ,
लेकर उठने वाला है हिंदुस्तान।

दिनकर सर्वधर्म समभाव के पक्षधर कवि हैं। दिनकर ऐसी सृष्टि के हिमायती हैं, जिसका  धरातल मनुष्यता पर केंद्रित है।

मांगो, मांगो, वरदान धाम चारों से,
मंदिरों, मस्जिदों, गिरजों, गुरुद्वारों से।

दिनकर ने एक कविता में होली और मुहर्रम दोनों का एक साथ उल्लेख किया है। दिनकर का संपूर्ण लेखन राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सदभाव की मुखरता को अभिव्यक्ति देती है।

मची मुहर्रम घर में जिसके, यह उसकी होली कैसी?
श्याम नहीं हैं, फिर ब्रज-बालाओं की रंग-रोली कैसी?

दिनकर का दृष्टिकोण सदा से ही मानवतावादी रहा है। दिनकर ने प्रेम को परिभाषित करते हुई लिखा है कि-

प्रेम मानवी की निधि है।

दिनकर के काव्य में अतीत को वाणी मिली है। दिनकर का इतिहास प्रेम मुखरित हुआ है। दिनकर की अतीत भावना कहीं बुद्ध की दिव्य आत्मा से आलोकित है, कहीं मौर्य और गुप्त के भव्य ऐश्वर्य से श्रीयुक्त है। तभी तो दिनकर पूछते है-

ओ मगध! कहां मेरे अशोक? वह चंद्रगुप्त बलधाम कहां?

आज संपूर्ण दुनिया, जिस तनाव और हिंसा से गुजर रही है। वहां दिनकर की मानवतावादी संकल्पना अपरिहार्य रूप से अपनी प्रासंगिकता दर्ज कराती है। दिनकर मानवीय आशा के कवि हैं।

कुरुक्षेत्र की धूल नहीं इति पंथ की,
मानव ऊपर और चलेगा,
मनु का यह पुत्र निराश नहीं,
नव धर्म-प्रदीप अवश्य जलेगा।

– लेखक: प्रो. मनीष चौधरी

(लेखक, दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।)

Tags :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
देश में 231 दिनों बाद अब तक की सबसे बड़ी राहत, 24 घंटे में दर्ज हुए 13 हजार 58 नए केस, मौतें भी घटी
देश में 231 दिनों बाद अब तक की सबसे बड़ी राहत, 24 घंटे में दर्ज हुए 13 हजार 58 नए केस, मौतें भी घटी