कांग्रेस में रायशुमारी से राह निकालने की कोशिश

दरअसल जब-जब पार्टी और सरकार को महत्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं तब-तब प्रदेश प्रभारी को आगे किया जाता है कि वे सबसे रायशुमारी भी कर लें, नेताओं के मन की बात भी टटोलें और सत्ता व संगठन क्या चाहता है इससे अवगत भी करा दें जिससे पार्टी में अनावश्यक विवाद की स्थिति ना बने। अब पार्टी को कुछ महत्वपूर्ण लेना है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष तय किया जाना है, निगम-मंडलों में नियुक्तियां होना है और मंत्रिमंडल का विस्तार भी करना है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने निगम-मंडलों में नियुक्ति को लेकर कुछ बातें तय कर दी हैं,

मसलन 15 वर्षों तक भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष करने वाले नेताओं जो की टिकट से भी वंचित रहे, को रिक्तियों के समय प्राथमिकता दी जाएगी, साथ ही कुछ लोगों को टिकट वितरण के समय कहा गया था कि आप प्रत्याशी को चुनाव में जिताइए आपको सरकार बनने पर निगम-मंडल में एडजस्ट किया जाएगा। कुछ नेताओं से विधान परिषद में सदस्य बनाने का आश्वासन भी दिया गया था। यही कारण है कि अब सरकार दोनों ही क्षेत्रों में सक्रियता दिखा रही है। दीपक बावरिया ने जहां विभिन्न नेताओं से मुलाकात करके रायशुमारी की है वहीं सरकारी स्तर पर विधान परिषद बनाने की कवायद भी तेज कर दी है।

बहरहाल दीपक बाबरिया ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिनभर बैठ कर पार्टी पदाधिकारियों और आधा दर्जन मंत्रियों से मुलाकात की। बावरिया से मिलने वाले मंत्रियों में डॉक्टर गोविंद सिंह, बाला बच्चन, पीसी शर्मा, कमलेश्वर पटेल, प्रियव्रत सिंह, महेंद्र सिंह सिसोदिया प्रमुख रूप से शामिल थे। बाबरिया ने मंत्रियों से चर्चा करके सरकार की नब्ज टटोली। बाबरिया चुनाव के पहले जहां क्षत्रप नेताओं के बीच तालमेल बनाते आए हैं वहीं सरकार बनने के बाद सबको साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी कहा है कि क्षेत्रीय गुट, जातीय संतुलन बनाना जरूरी है जिससे कहीं भी असंतोष के हालात ना बनें।

बावरिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ प्रदेश अध्यक्ष कौन हो, इस पर भी चर्चा की, साथ ही आगामी दिनों में प्रदेश में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा भी की। कुल मिलाकर कांग्रेस 15 वर्षों के बाद सत्ता में लौटने के कारण सतर्क और सावधान है। पार्टी की भाजपा नेताओं की सक्रियता पर भी नजर है। यही कारण है कि भाजपा ने जब 4 नवंबर को किसान आक्रोश आंदोलन करने का तय किया है तब पार्टी में केंद्र सरकार के खिलाफ उपवास पर बैठने की योजना बनाई जा रही है। जाहिर है दीपक बाबरिया की मुख्यमंत्री के साथ-साथ पार्टी के नेताओं से मुलाकात के बाद आगामी दिनों में रायशुमारी से जो भी निर्णय निकलेंगे उनसे पार्टी एक नई राह पर चलने की कोशिश करेगी।

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