मोदी पर शिव सेना की नरमी क्यों?

शिव सेना ने भाजपा पर हमले के लिए लगाई गई अपनी तोपों का मुंह मोड़ दिया है। अब उन्होंने सर्फ अमित शाह को निशाना बनाना शुरू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनके सुर नरम पड़ गए हैं। शिव सेना नेता संजय राउत ने कहा है कि मुख्यमंत्री पद के बंटवारे को लेकर शायद प्रधानमंत्री को नहीं बताया गया था। इस तरह उन्होंने इस विवाद से प्रधानमंत्री को दूर रखने का दांव चला है। माना जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसियों की जांच से ठाकरे परिवार को दूर रखने और आगे फिर कभी भाजपा के साथ तालमेल करने का रास्ता खुला रखने के मकसद से शिव सेना ने यह पहल की है।

बहरहाल, संजय राउत ने दूसरा दांव यह चला है कि उन्होंने बाला साहेब ठाकरे की कसम खानी शुरू कर दी है। असल में इस बार शिव सेना और भाजपा में चल रही खींचतान से आम लोगों के बीच शिव सेना को नुकसान हो रहा है। लोगों की धारणा उसके बारे में बदल रही है। पिछली बार जब दोनों पार्टियां अलग हुई थीं तब भाजपा के प्रति धारणा बिगड़ी थी। लोग शिव सेना के समर्थन में थे और तभी राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने पहल करके दोनों का तालमेल कराया। इस बार शिव सेना को नुकसान हो रहा है, कम से कम धारणा के स्तर पर। इसलिए राउत ने बाल ठाकरे की कसम खाकर कहा है कि उनके कमरे में ही अमित शाह से बात हुई थी और फिफ्टी-फिफ्टी का फार्मूला तय हुआ था। संजय राउत ने यह भी कहा है कि बाल ठाकरे का वह कमरा उनके लिए मंदिर की तरह है।

सो, सारा ठीकरा शाह के ऊपर फोड़ा जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस काम में शिव सेना की मदद की है। पिछले दिनों अमित शाह ने कहा था कि अगर फिफ्टी-फिफ्टी का फार्मूला तय हुआ था तो वे और प्रधानमंत्री मोदी दोनों प्रचार में बार बार कह रहे थे कि चुनाव के बाद सरकार बनी तो देवेंद्र फड़नवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे तब शिव सेना ने इस पर सवाल क्यों नहीं उठाया था? इसका जवाब राहुल गांधी ने ट्विट करके दिया। उन्होंने पूछा कि चुनाव प्रचार में उद्धव ठाकरे और शिव सेना के दूसरे नेता बार बार कह रहे थे कि मुख्यमंत्री कोई शिव सैनिक बनेगा, तो भाजपा ने क्यों आपत्ति नहीं की थी?

इस बीच मुंबई में आय कर विभाग की छापेमारी शुरू हो गई है। आय कर विभाग ने शिव सेना के कब्जे वाले बृहन्नमुंबई नगर निगम के कई ठेकेदारों के यहां छापे मारे हैं और कहा जा रहा है कि साढ़े सात सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की गड़बड़ी पकड़ी गई है। यह प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी। फिर इसमें ईडी को भी शामिल किया जाएगा और माना जा रहा है कि जांच की आंच सीधे मातोश्री तक पहुंच सकती है। इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि शिव सैनिकों के सुर इस कारण भी नरम पड़ने लगे हैं।

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