समय से पहले अयोध्या पर फैसला

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन का फैसला 14 या 15 नवंबर को आने वाला था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले थे। लेकिन उस दिन रविवार था। चूंकि शनिवार और रविवार को अदालत में छुट्टी होती है इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा था कि रिटायर होने से पहले गुरुवार या शुक्रवार को यानी 14 या 15 नवंबर को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच फैसला सुनाएगी।

पर अदालत ने दूसरे शनिवार की छुट्टी के दिन नौ नवंबर को ही फैसला सुना दिया। नौ नवंबर को फैसला आएगा, इसके बारे में जानकारी भी आठ नवंबर की शाम को दी गई। जब इस मामले की सुनवाई चल रही थी तब चीफ जस्टिस ने सभी पक्षों को हड़काते हुए कहा था कि 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करनी है। बाद में उन्होंने इसे घटा कर 16 अक्टूबर कर दिया और अंत में इससे भी एक दिन पहले ही सुनवाई पूरी कर ली। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि भगवान ही जानता है कि हम एक महीने में कैसे फैसला लिख पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि एक महीने में पांचों जज फैसला लिख पाए तो यह चमत्कार की होगा।

यह चमत्कार एक महीने से एक हफ्ते पहले ही हो गया। सोचें, इतने बड़े और पुराने मामले का फैसला अदालत ने 23 दिन में लिख लिया। जाहिर है जजों ने रात-दिन एक करके फैसला लिखा है। बहरहाल, बताया जा रहा है कि समय से थोड़ा पहले और औचक अंदाज में फैसला का ऐलान इसलिए किया गया ताकि दंगा फसाद करने की मंशा रखने वाले असामाजिक तत्वों को तैयारी के लिए समय न मिले। इसके अलावा एक कारण यह भी है कि चीफ जस्टिस को रिटायर होने से पहले इस फैसले पर समीक्षा का भी समय मिल जाएगा।

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