नौ नवंबर के कितने संयोग

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद का फैसला नौ नवंबर को आया। सवाल है जिस फैसले के 14 या 15 नवंबर को आने की बात थी वह नौ नवंबर को क्यों सुनाया गया? यह अनायास हुआ या इसके पीछे कोई डिजाइन है? इस सवाल का जवाब नहीं मिलेगा पर संयोग सबके सामने है। एक संयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के गुरदासपुर में बताया। उन्होंने कहा कि नौ नवंबर को ही बर्लिन की दीवार गिरी थी। मोदी ने कहा कि नौ नवंबर ऐतिहासिक तारीख है क्योंकि उस दिन बर्लिन की दीवार गिरी थी, इसी दिन करतारपुर में दो पवित्र सिख तीर्थस्थलों को जोड़ने वाले कॉरीडोर का उद्घाटन हुआ और इसी दिन अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया।

एक दूसरा संयोग भी है, जो मंदिर विवाद से ही जुड़ा हुआ है, जिसका जिक्र कहीं नहीं किया जा रहा है। तीस साल पहले नौ नवंबर 1989 को ही राम मंदिर में शिलान्यास हुआ था। यह एक ऐतिहासिक तारीख है। 30 साल के बाद उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम और निर्णायक फैसला सुनाया। अदालत ने समूची विवादित जमीन रामलला को दे दी और केंद्र सरकार से कहा कि वह इस जगह पर मंदिर निर्माण का काम कराए। तभी इस संयोग की ओर ज्यादा ध्यान दिलाया जा रहा है। कई जानकार मान रहे हैं कि शिलान्यास की तारीख पर ही अंतिम फैसला सुनाना अनायास नहीं हुआ है।

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