आडवाणी और सिंघल भी याद किए गए

राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद दूसरी तमाम बातों के साथ साथ इस मामले में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने वाले कई लोगों को याद किया गया। भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे दिवंगत अशोक सिंघल को याद किया। स्वामी ने ट्विट करके कहा कि इस फैसले के साथ उनको सिंघल याद आ रहे हैं। इसके आगे उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से कहा कि वह तत्काल अशोक सिंघल को भारत रत्न देने की घोषणा करे। ध्यान रहे नब्बे के दशक में जब भाजपा ने मंदिर को राजनीतिक मुद्दा बनाया तब धार्मिक लड़ाई विश्व हिंदू परिषद ने सिंघल और प्रवीण तोगड़िया की कमान में ही लड़ी गई थी। ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’, ‘जय श्रीराम’, ‘सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे’, ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ और ‘बच्चा बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’ जैसे तमाम नारे विश्व हिंदू परिषद ने ही गढ़े थे।

बहरहाल, स्वामी ने सिंघल को याद किया तो मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं उमा भारती ने लालकृष्ण आडवाणी को याद किया। वे उनसे मिलने उनके घर गईं। उन्होंने मंदिर आंदोलन में आडवाणी के योगदान की याद दिलाई। खुद आडवाणी ने कहा कि वे इस फैसले से धन्य हो गए और सही भी साबित हुए। उमा भारती के अलावा शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी आडवाणी को याद किया। उन्होंने कहा कि वे आडवाणी से मिलेंगे और तब अयोध्या जाएंगे। ध्यान रहे 1984 के लोकसभा चुनाव में हार कर भाजपा के दो सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी के पालमपुर सम्मेलन में आडवाणी ने ही मंदिर का प्रस्ताव रखा था और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया था। उन्होंने इसके लिए सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा भी की थी और इसी दौरान उनको बिहार में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद केंद्र की वीपी सिंह सरकार गिरी थी।

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