आखिर आजसू की जिद का क्या राज है?

झारखंड में भाजपा की पुरानी सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन, आजसू ने भाजपा को गजब परेशान किया है। कहां तो भाजपा के नेता आजसू के अस्तित्व से इनकार कर रहे थे। उसके नेता सुदेश महतो के तीन चुनाव लगातार हारने को बहाना बना कर यहां तक कह रहे थे

उनकी पार्टी का विलय भाजपा में हो जाएगा। यह भी कहा जा रहा था कि भाजपा उनको छह से आठ सीट देगी।

पर आजसू ने भाजपा के समूचे नेतृत्व को घुटने पर ला दिया। पिछले दिनों खबर थी कि उनको अमित शाह से मिलने के लिए बुलाया। रात में करीब 11 बजे मीटिंग तय थी।

मीटिंग के बाद अगले दिन सुदेश महतो के रांची लौटने के बाद  उनकी पार्टी के नेताओं ने कहा कि महतो ने अपने 19 सीटों की सूची भाजपा अध्यक्ष को दी और कहा कि

अगर वे इस पर राजी होते हैं तो आगे बात होगी। उसके बाद बताया जा रहा है कि सुदेश ने रांची में मुख्यमंत्री रघुवर दास से बात करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि रघुवर दास अपनी पार्टी के नेता नहीं हैं, जबकि सुदेश अपनी पार्टी के सुप्रीम नेता हैं। तभी उनकी बातचीत भाजपा के प्रभारी ओम माथुर से होती रही।

सबसे समझाने के बावजूद सुदेश महतो भाजपा के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े करते रहे। एक-दो से बढ़ कर यह संख्या छह तक पहुंच गई।
सवाल है कि आखिर सुदेश महतो की इस जिद का क्या राज है?

क्या महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजों ने उनको ताकत दी है और उनक लग रह है कि वे भाजपा नेतृत्व को दबा लेंगे? या उन्हें राज्य में हालात भाजपा के अनुकूल नहीं

दिख रहे हैं? जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री विरोधी एक मजबूत खेमे ने सुदेश महतो की हिम्मत बढ़ाई है।

इसी वजह से वे आखिरी समय तक जिद पकड़े रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में सुदेश की पार्टी के लिए एक सीट छोड़ने का भाजपा का फैसला

उस पर भारी पड़ रहा है। अपनी पार्टी से एक लोकसभा सांसद जीत जाने से भी सुदेश महतो की हिम्मत बढ़ी।

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