नीतीश अब भाजपा के साथ ही लड़ेंगे

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपनी सहयोगी भाजपा का समर्थन करने का अपना फर्ज पूरी ईमानदारी से निभाया है। उन्होंने नागरिकता कानून में संशोधन के बिल का समर्थन किया है। लोकसभा में उनकी पार्टी के 16 सांसदों ने इसका समर्थन किया ध्यान रहे जनता दल यू पहली पार्टी थी, जिसने नागरिकता कानून में संशोधन और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का विरोध किया था। उनकी पार्टी के दिल्ली में बैठे नेताओं और प्रवक्ताओं ने दो टूक अंदाज में इस बिल का विरोध करने का ऐलान किया था। पर जदयू ने विरोध तो नहीं ही किया, समर्थन भी परोक्ष रूप से नहीं किया। यानी गैरहाजिर होकर या वाकआउट करके मदद नहीं, बल्कि खुल कर समर्थन किया।

इससे आहत के पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने अपना दुख सार्वजनिक रूप से जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि अपनी पार्टी के इस रुख से निराश हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी ने अपने संविधान के पहले पन्ने पर तीन बार सेकुलर शब्द लिखा है, उसका क्या मतलब है। पर ऐसा लग रहा है कि नीतीश कुमार को अपनी पार्टी के संविधान या अपने उपाध्यक्ष की चिंता से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने भाजपा के साथ लड़ने का फैसला किया है। तभी भाजपा के प्रति वे सिर्फ सद्भाव दिखा रहे हैं ताकि विधानसभा चुनाव के समय सीटों के बंटवारे में बेहतर मोलभाव किया जा सके। पर उनकी पार्टी के ही नेता मानते हैं कि भाजपा जितनी मजबूत होगी, नीतीश की मोलभाव की ताकत उतनी कम होगी।

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