भाजपा के लिए महाराष्ट्र में मुश्किल

भारतीय जनता पार्टी को महाराष्ट्र में अभी और भी झटका लग सकता है। अपनी सहयोगी के साथ छोड़ने और समूचे विपक्ष के एक हो जाने की ऐतिहासिक परिघटना को भी भाजपा नेताओं ने समझा नहीं है। इसलिए उन्होंने सब कुछ जस का तस चलने दिया। अपने विधायकों और पार्टी नेताओं की नाराजगी की परवाह किए बगैर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को नेता विपक्ष बनाया गया। इस तरह पार्टी की कमान उनके हाथ में ही रहने दिया। तभी फड़नवीस ने अमित शाह का पढ़ा पुराना शेर सुनाया कि वे समंदर हैं, लौट कर आएंगे। उनके इस शेर ने पार्टी के कई नेताओं को नाराज किया है।

जिस दिन फड़नवीस ने लौट कर आने का शेर पढ़ा उसी दिन भाजपा के दिग्गज नेता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे ने फेसबुक पोस्ट लिख कर ऐलान किया कि वे कुछ बड़ा फैसला करने वाली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनको आत्मचिंतन की जरूरत है। जानकार सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में भाजपा के ओबीसी नेता नाराज हैं। उनको लग रहा है कि भाजपा भी ब्राह्मण और मराठा राजनीति कर रही है। ऐसी राजनीति कांग्रेस और एनसीपी करते रहे हैं। भाजपा का हमेशा फोकस ओबीसी वोट पर रहा है।

तभी इस बात की अटकलें लगाई जाने लगी हैं की पंकजा मुंडे भी पार्टी छोड़ सकती हैं। हालांकि मुश्किल यह है कि उनके पास पार्टी छोड़ कर किसी दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प नहीं है। उनको हराने वाले उनके चचेरे भाई धनंजय मुंडे एनसीपी में हैं और एनसीपी ने शिव सेना के साथ सरकार बनाई है। इसलिए अगर पंकजा शिव सेना में जाना चाहती हैं तो उनकी वजह से गठबंधन में टकराव ब़ढ़ सकता है, जो कि अभी उद्धव ठाकरे नहीं चाहेंगे। हां, चुनाव से पहले वे जरूर पंकजा को अपने साथ लेना चाहेंगे। आखिर पंकजा के पिता पहली शिव सेना भाजपा सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे थे। तभी यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा का चुनाव हारीं पंकजा मुंडे विधान परिषद के लिए पार्टी पर दबाव बनाने की राजनीति कर रही हैं।

बहरहाल, पंकजा मुंडे नाराज हैं, एकनाथ खड़से नाराज हैं, विनोद तावड़े नाराज हैं, वामनकुले नाराज हैं, नाराज नेताओं की यह लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से कई नेता शिव सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ये नेता नेतृत्व बदलने की मांग कर रहे थे पर भाजपा आलाकमान ने सुनवाई नहीं की। अगर महाराष्ट्र में भाजपा के कुछ नेता पार्टी छोड़ते हैं तो इसका बड़ा असर पूरे देश में होगे। वैसे भी भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में गए नाना पटोले के स्पीकर बनाए जाने से भी नेताओं के लिए रास्ता खुला है।

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