टीम राहुल को चाहिए राज्यसभा!

कांग्रेस पार्टी में टीम राहुल गांधी के सदस्य माने जाने वाले लगभग सारे नेता चुनाव हारे हुए हैं। दक्षिण भारत में जरूर राहुल के कुछ करीबी चुनाव जीत गए पर देश के बाकी सभी हिस्से में उनके करीबी नेता चुनाव हार गए। अब इन सभी हारे हुए नेताओं को राज्यसभा की दरकार है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरियाणा में दीपेंद्र हुड्डा, महाराष्ट्र में मिलिंद देवड़ा और राजीव सातव, दिल्ली में अजय माकन, राजस्थान में जितेंद्र सिंह जैसे नेताओं की लंबी सूची है।

सवाल है कि राहुल कैसे इतने सारे नेताओं को राज्यसभा में भिजवा पाएंगे? यह भी ध्यान रखना होगा कि प्रियंका गांधी वाड्रा के करीबी राजीव शुक्ला जैसे नेता भी संसद से बाहर हैं और अगले साल किसी जुगाड़ से राज्यसभा पहुंचना चाहते हैं। सोनिया गांधी की टीम के पुराने सदस्यों में से भी कई ऐसे हैं, जो इस बार चुनाव हार गए या लगातार दूसरी बार हारे हैं। उनकी लॉबिंग अहमद पटेल के यहां चल रही है।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने मिलिंद देवड़ा को राज्यसभा भेजने का वादा किया है। महाराष्ट्र में अगले साल सात सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से एक शिव सेना की, दो एनसीपी की हैं और एक सीट कांग्रेस की। उसके सांसद हुसैन दलवई रिटायर हो रहे हैं। कांग्रेस को इस बार भी एक ही सीट मिल पाएगी। सो, उसे फैसला करना है कि वह मुस्लिम-दलित समीकरण पर ध्यान देती है या देवड़ा को राज्यसभा भेजती है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस को दो सीटें मिलेंगी। पर मुश्किल यह है कि वहां दिग्विजय सिंह भी रिटायर हो रहे हैं। सो, दिग्विजय की टिकट काट कर सिंधिया को राज्यसभा भेजना थोड़ा मुश्किल होगा। उनके लिए किसी दूसरे राज्य में सीट देखनी होगी। हरियाणा में दीपेंद्र हुड्डा को इंतजार करना होगा क्योंकि अगले साल प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा रिटायर हो रही हैं। पर वह सीट कांग्रेस को नहीं मिल पाएगी। भाजपा और जजपा का साझा उम्मीदवार इस सीट पर जीतेगा।

राजस्थान में जरूर कांग्रेस को दो सीटों का फायदा होगा। अगले साल रिटायर हो रहे तीनों सांसद भाजपा के हैं। इस बार इनमें से दो सीटें कांग्रेस को मिलेंगी। अगर राहुल गांधी ने चाहा तो जितेंद्र सिंह राज्यसभा में जा सकते हैं। बाहर से भी लाकर किसी नेता को राज्यसभा में भेजा जा सकता है। ऐसे ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को खाली हो रही दोनों सीटें मिलेंगी पर उनमें भी एक सीट मोतीलाल वोरा की है। सो, ऐसा लग रहा है कि राहुल के ज्यादातर करीबी नेताओं को संसद में जाने के लिए इंतजार करना होगा।

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