आप दोहरा रही भाजपा की गलती

हम भारत के लोग इतिहास से सबक नहीं सीखते हैं और तभी इतिहास के कूड़ेदान में पड़े रहते हैं। यह बात जितनी आम भारतीय पर लागू है उससे कई गुना ज्यादा देश की राजनीतिक पार्टियों और संभवतः सबसे होशियार नेताओं पर भी लागू होती है। भारत में पार्टियां और उसके नेता कभी भी इतिहास से सबक नहीं लेते हैं। निकट अतीत को भी याद नहीं रखते हैं या अपनी सुविधा के हिसाब से भूल जाते हैं। तभी दिल्ली में अपनी सरकार बचाने उतरी आम आदमी पार्टी वहीं गलती कर रही है, जिसकी वजह से भाजपा ने तीन महीने पहले महाराष्ट्र में और एक महीने पहले झारखंड में सत्ता गंवाई है।

भाजपा अपने को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है। पर राज्यों के चुनाव से पहले उसने उम्मीदवार भरती अभियान शुरू किया था। भाजपा ने दिल खोल कर दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया और उनको टिकट दी। इस बात का भी ख्याल नहीं रखा कि नेता का अतीत कैसा है और उसे लेकर आम लोगों की क्या सोच है। पहले यह काम महाराष्ट्र में हुआ और वहां लगभग तमाम दलबदलुओं को लोगों ने हरा दिया इसके बावजूद भाजपा ने यहीं काम झारखंड में भी किया। वहां भी दूसरी पार्टियों से लाए एक या दो अपवाद को छोड़ दें तो सारे बड़े नेता चुनाव हार गए।

अब वहीं गलती आम आदमी पार्टी दिल्ली में कर रही है। दिल्ली में भाजपा और कांग्रेस विपक्ष में हैं। भाजपा के चार और कांग्रेस का कोई भी विधायक नहीं है। सो, अगर भाजपा और कांग्रेस दूसरी पार्टी से उम्मीदवार लेते हैं तो बात समझ में आती है। पर जो पार्टी सत्ता में है और जिसकी सारी राजनीति एक चेहरे यानी अरविंद केजरीवाल के ईर्द-गिर्द चलती हो उसे दूसरी पार्टी से उम्मीदवार लेने की क्या जरूरत है? जब आप का समूचा चुनाव केजरीवाल के चेहरे और पांच साल के कामकाज पर है फिर भी उसे दूसरी पार्टियों से उम्मीदवार लेने पड़ रहे हैं तो इसका मतलब पार्टी भरोसे में नहीं है और यह मैसेज उसके लिए भारी पड़ सकता है।

बता दें कि आप ने कांग्रेस के बड़े नेता महाबल मिश्र के बेटे विनय मिश्र को शामिल किया है और उनको द्वारका सीट से टिकट दी है। उस सीट पर आप के सबसे बेहतरीन नेताओं में से आदर्श शास्त्री जीते थे। वे लाल बहादुर शास्त्री के पोते हैं। विनय मिश्र के लिए आप ने उनकी टिकट काट दी। इसका मतलब है कि पार्टी प्रवासी वोटों को लेकर भरोसे में नहीं है। ऐसे ही मटिया महल के पूर्व विधायक शुएब इकबाल को आप में लेकर टिकट दिया गया है। वे दिल्ली में चुनाव लड़ने वाली सभी पार्टियों से लड़ चुके हैं। उनके पूरे परिवार को पार्टी में लेने का मतलब है कि पार्टी मुस्लिम वोट को लेकर भी भरोसे में नहीं है। चांदनी चौक से कांग्रेस के विधायक रहे प्रहलाद सिंह साहनी को भी इस बार आप में शामिल करके टिकट दी गई है। कांग्रेस से दो बार विधायक रहे राम सिंह नेताजी को आप में शामिल किया गया है और पार्टी ने उनको बदरपुर से टिकट दिया है।

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