दिल्ली में भाजपा के कंफ्यूजन का खेल

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कंफ्यूजन बनाने का काम शुरू कर दिया है। भाजपा हर जगह यह दांव चलती है। जिन राज्यों में मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं होता है वहां उसके नेता चुनाव से पहले हर समुदाय के लोगों को यह मैसेज देते हैं कि उनके समुदाय का नेता मुख्यमंत्री बन सकता है। 2014 के चुनाव में महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भाजपा ने यह दांव चला था। इसका उसे बड़ा फायदा हुआ। 2019 में इन राज्यों में वह मुख्यमंत्रियों के नाम पर चुनाव लड़ने गई तो उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

चूंकि दिल्ली में भाजपा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं घोषित करना है इसलिए वह कंफ्यूजन फैला रही है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऐलान किया कि प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी मुख्यमंत्री बनेंगे। फिर दो घंटे बाद उन्होंने अपनी बात वापस ले ली और कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। पर इन दो घंटों में उनकी बात पूर्वांचल के लोगों तक पहुंच गई। वैसे पहले से भी तिवारी को दावेदार माना जा रहा है और ऊपर से एक बड़े पंजाबी नेता ने उनकी दावेदारी पर मुहर लगाई तो अपने आप यह मैसेज हो गया कि इस बार पूर्वांचल का मुख्यमंत्री हो सकता है।

इस दांव का अगला विस्तार होगा कि भाजपा का कोई बड़ा नेता विजय गोयल या डॉक्टर हर्षवर्धन के लिए ऐसा ही बयान देगा। फिर उसका भी खंडन हो जाएगा। फिर किसी नेता से प्रवेश वर्मा का नाम आगे कराया जाएगा। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के स्टार प्रचारक इसी अंदाज में अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग नेताओं के नाम का ऐलान करेंगे ताकि प्रवासी, वैश्य, जाट, पंजाबी सबमें यह मैसेज बने कि उनका मुख्यमंत्री हो सकता है। हालांकि भाजपा में इस दांव की सफलता मुश्किल लग रही है।

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