स्वदेशी जागरण मंच क्या करेगा?

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच का हौसला इन दिनों बढ़ा हुआ है। मंच ने क्षेत्रीय व्यापक सहयोग संधि यानी आरसीईपी से भारत के जुड़ने और आसियान देशों व चीन, जापान, कोरिया के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के लिए भारत में आयात शुल्क मुक्त कारोबार का रास्ता खोलने के प्रस्ताव का विरोध किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में वहीं फैसला किया, जो स्वदेशी जागरण मंच और कुछ दूसरे संगठन चाहते थे। भारत ने बैंकॉक में हुए सम्मेलन में इस संधि पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।

अब स्वदेशी जागरण मंच ने सरकारी कंपनियों की बिक्री का विरोध किया है। उसने यहां तक कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने जिन पांच सरकारी कंपनियों को बेचने का फैसला किया है उनकी बिक्री देश हित में नहीं है, बल्कि यह देश विरोधी है। सोचें, अगर संघ से जुड़ी कोई संस्था सरकार के किसी फैसले को देश विरोधी बताए तो विपक्षी पार्टियां उस पर कैसी राजनीति करेंगी? ध्यान रहे विपक्ष पहले से इस फैसले का विरोध कर रहा है।

पर सवाल है कि स्वदेशी जागरण मंच मुहंजबानी विरोध ही करेगा या उसके अलावा कोई सक्रिय आंदोलन या विरोध प्रदर्शन भी करेगा? विपक्षी पार्टियां इस पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही हैं। मुनाफा कमाने वाली तेल कंपनी बीपीसीएल और शिपिंग कारपोरेशन, कंटेनर कारपोरेशन जैसी कंपनियों को बेचने के विरोध में कर्मचारी व मजदूर संगठन भी आंदोलन की तैयारी में हैं। पर सरकार के लिए मुश्किल यह है कि उसको पैसे की इतनी जरूरत है कि वह इन आंदोलनों की परवाह किए बगैर कंपनियों को बेचेगी।

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