गांधी के साथ यह क्या हो रहा?

यह देश महात्मा गांधी का है। ये बात देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं वहां लोगों को बताते हैं। दुनिया के दूसरे देशों के नेता भी आते-जाते यहीं कहते हैं कि ये देश गांधी का है। पर गांधी के देश में गांधी के साथ जो हो रहा है वह हैरान करने वाला है। उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि गांधी के नाम की माला जपने वाली सरकार भी कुछ नहीं कर रही है।

शुक्रवार को यानी 15 नवंबर को देश में कई जगह नाथूराम गोडसे की पुण्यतिथि मनाई गई। महात्मा गांधी की हत्या करने वाले गोडसे को 15 नवंबर 1949 को फांसी दी गई थी। सो, हिंदू महासभा ने 15 नवंबर को गोडसे और उसके साथ ही फांसी की सजा पाए नारायण आप्टे को याद किया। इतना ही नहीं हिंदू महासभा ने यह भी कहा कि गोडसे ने गांधी की हत्या की सुनवाई के समय अदालत में जो बयान दिया था, उसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। इसी तरह दो अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर ‘गोडसे अमर रहे’ का नारा ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा। महासभा ने उनको आर्किटेक्ट ऑफ पार्टिशन कह कर देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया। क्या सरकार गोडसे को महिमांडित करने वालों की पहचान करके उन्हें सजा नहीं दे सकती है?

इसी तरह पिछले दिनों गुजरात के एक स्कूल में बच्चों से सवाल पूछा गया था कि महात्मा गांधी ने कैसे आत्महत्या की थी। गांधी की हत्या को आत्महत्या बताने का सवाल ऐसा नहीं था कि गलती से प्रश्नपत्र मं शामिल हुआ था। जान बूझकर या गांधी के प्रति घृणा के भाव से ऐसा किया गया था। उसी तरह पिछले हफ्ते ओड़िशा से खबर आई कि वहां स्कूलों और कई संस्थाओं में एक बुकलेट बांटी गई, जिसमें बताया गया है कि गांधी की मौत हालातों के कारण घटी एक दुर्घटना थी। सोचें, कहीं हत्या करने वाले को महिमामंडित किया जा रहा है, कहीं हत्या को आत्महत्या बताया जा रहा है तो कहीं हत्या को दुर्घटना बताने की साजिश हो रही है। और गांधी के नाम की कसम खाने वाली सरकार कुछ नहीं कर रही है।

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