जेएनयू की बहस फिर शुरू हुई

टुकड़े टुकड़े गैंग के मुख्यालय से लेकर नोबल पुरस्कार के विजेता के शिक्षण संस्थान तक, एक बार फिर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जेएनयू चर्चा में है। पिछले कई साल से भाजपा के नेताओं और सोशल मीडिया में उनके समर्थकों ने जेएनयू को देश तोड़ने वाले लोगों को प्रश्रय देने वाला संस्थान बना रखा है। वहां के छात्र नेताओं को देशद्रोही माना जाता है। उनके ऊपर मुकदमे हुए हैं। छात्रों से लेकर फैकल्टी के सदस्यों तक की बोलने और आंदोलन करने की आजादी पर रोक लगाई जा रही है। जगदीश कुमार को वाइस चांसलर बन कर जाने के बाद छात्र और शिक्षण संगठनों का यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ टकराव बढ़ा है।

पर अब अचानक तस्वीर बदल गई है। जेएनयू से 1981-83 में एमए करने वाले छात्र अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार मिल गया है। सो, जेएनयू को टुकड़े टुकड़े गैंग का मुख्यालय बताने वाले भी बनर्जी को बधाई देने में लग गए हैं। वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने भी उनको बधाई दी है और यह भी कहा है कि यह इस संस्थान की शिक्षा की गुणवत्ता को दिखाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे भाजपा नेताओं ने भी बनर्जी को बधाई दी है। इससे जेएनयू से निकले छात्र और भाजपा का विरोध करने वाले उन लोगों को तलाश रहे हैं, जो जेएनयू में पढ़ने और शोध करने वालों पर सवाल उठाते रहे हैं। निगेटिव से निकल पॉजिटिव खबरों के कारण जेएनयू चर्चा में है।

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