कर्नाटक उपचुनाव के बाद बदलेगी तस्वीर

कर्नाटक में अयोग्य ठहराए गए विधायकों के बारे में जल्दी ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। उससे पहले ही चुनाव आयोग ने पांच दिसंबर को राज्य में उपचुनाव कराने की तारीख तय कर दी है। यह उपचुनाव सरकार के लिए जितना अहम है उतना ही अहम विपक्ष के लिए भी है। तभी दोनों अपने अपने हिसाब से तैयारी कर रहे हैं। ध्यान रहे 17 विधायकों के इस्तीफा देने या अयोग्य ठहराए जाने की वजह से ही भाजपा को अपने 105 विधायकों के दम पर दम पर बहुमत मिला हुआ है। तभी उसके लिए इसमें से ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल करना बहुत जरूरी है। उसे अपने दम पर बहुमत तक पहुंचने के लिए कम से कम आठ सीटें जीतनी होंगी। अगर ज्यादा सीटें कांग्रेस और जेडीएस ने जीती तो समीकरण बदल जाएंगे।

अभी जेडीएस के नेता एचडी देवगौड़ा ने इसलिए भी भाजपा और मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के प्रति सद्भाव दिखाया है क्योंकि उनको लग रहा है कि सरकार बहुमत के लिहाज से तलवार की धार पर रहेगी। ऐसे में जेडीएस के 37 विधायकों का समर्थन उसको स्थायित्व देगा। सो, संभव है कि उपचुनाव के नतीजों के बाद जेडीएस परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से भाजपा का साथ दे। अगर नतीजे पूरी तरह से उलट गए और कांग्रेस व जेडीएस ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया तो यह भी संभव है कि फिर से कांग्रेस और जेडीएस की साझा सरकार बनाने की पहल हो। तीसरी स्थिति यह है कि भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल कर ले। जो हो उपचुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा।

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